प्रकाश मेहरा
स्पेशल डेस्क
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका, इजरायल तथा ईरान के बीच चल रहे टकराव ने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार को हिला कर रख दिया है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि कई देशों में पेट्रोल-डीजल और गैस की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। कई जगहों पर पेट्रोल पंपों के बाहर लंबी कतारें लग गई हैं और सरकारों को आपात कदम उठाने पड़ रहे हैं।
दरअसल, इस संकट की सबसे बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Hormuz Strait) का प्रभावित होना है। यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। तनाव बढ़ने और जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ गया है। इसके असर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा हो गया और कई देशों में ईंधन आपूर्ति बाधित होने लगी।
कई देशों में बढ़ा गैस और ईंधन संकट
इस स्थिति का असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि एशिया, यूरोप और अमेरिका तक फैल गया है। भारत समेत करीब 9 देशों में गैस और ईंधन की उपलब्धता पर दबाव बढ़ गया है। इन देशों में पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, जर्मनी, फ्रांस, इटली, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देश भी शामिल बताए जा रहे हैं।
इन देशों में पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ देखने को मिल रही है। कई जगहों पर लोग घंटों लाइन में लगकर ईंधन खरीदने को मजबूर हैं। कुछ स्थानों पर सरकारों ने पेट्रोल और डीजल की खरीद पर सीमा तय कर दी है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक आपूर्ति पहुंचाई जा सके।
लॉकडाउन जैसे हालात
कई क्षेत्रों में हालात इतने बिगड़ गए हैं कि स्थानीय प्रशासन को लॉकडाउन जैसे कदम उठाने पड़े हैं। लोगों से अनावश्यक यात्रा न करने की अपील की जा रही है। वहीं कुछ जगहों पर सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को सीमित कर दिया गया है ताकि ईंधन की बचत की जा सके।
भारत पर भी असर
भारत में अभी स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर घरेलू बाजार पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो भारत में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी संभव है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय तक प्रभावित रहता है तो इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। ऊर्जा संकट के कारण परिवहन, उद्योग और बिजली उत्पादन जैसे कई सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा भी पैदा हो सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर मिडिल ईस्ट की स्थिति पर टिकी हुई है, क्योंकि वहां की घटनाएं सीधे तौर पर वैश्विक ऊर्जा बाजार और आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर रही हैं।