यूपी डेस्क
यूपी:- क्रिसमस के अवसर पर भारत के विभिन्न हिस्सों में हिंदुत्ववादी संगठनों द्वारा क्रिश्चियन समुदाय की गतिविधियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन देखे गए। मुख्य घटना उत्तर प्रदेश के बरेली में हुई, जहां बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के सदस्यों ने सेंट अल्फोंसस कैथेड्रल चर्च के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ किया और “जय श्री राम” तथा “हर हर महादेव” जैसे नारे लगाए। यह विरोध क्रिसमस ईव (24 दिसंबर) की शाम को हुआ, जब चर्च में क्रिसमस की तैयारियां चल रही थीं।
क्रिश्चियन मिशनरियों के खिलाफ विरोध
प्रदर्शनकारी चर्च के गेट पर बैठे और जोर-शोर से जाप किया, जिससे स्थानीय तनाव बढ़ गया। पुलिस की मौजूदगी में यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन क्रिश्चियन समुदाय ने इसे धमकी और उत्पीड़न के रूप में देखा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें प्रदर्शनकारी हनुमान चालीसा गाते और नारे लगाते नजर आ रहे हैं। एक पोस्ट में इसे “क्रिश्चियन मिशनरियों के खिलाफ विरोध” बताया गया है, जबकि अन्य में इसे “सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने वाला” करार दिया गया।
हनुमान चालीसा पाठ की घोषणा की
सेंट अल्फोंसस कैथेड्रल चर्च, बरेली कैंटोनमेंट, उत्तर प्रदेश। 24 दिसंबर की शाम लगभग 9 बजे से शुरू, जो क्रिसमस ईव के दौरान हुआ। अन्य घटनाएं हिसार, हरियाणा बजरंग दल ने क्रिसमस के दिन (25 दिसंबर) क्रांतिमान पार्क के पास 160 साल पुराने चर्च के नजदीक सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ की घोषणा की थी। इससे पहले शहर में पोस्टर लगाए गए थे। पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी और घटना को रोकने के लिए तैनात की गई। रायपुर, छत्तीसगढ़ हिंदुत्ववादी कार्यकर्ताओं ने एक मॉल में क्रिसमस की सजावट को तोड़फोड़ किया।
नलबाड़ी, असम बजरंग दल के सदस्यों ने सेंट मैरी स्कूल में घुसकर क्रिसमस की सजावट को नुकसान पहुंचाया और कार्यक्रम रुकवाया। बाद में बच्चों से हनुमान चालीसा पढ़वाया गया। अन्य स्कूल घटना: एक स्कूल में बच्चों को सांता क्लॉज की ड्रेस में आने को कहा गया था, लेकिन बजरंग दल के हस्तक्षेप के बाद सभी ने हनुमान चालीसा पढ़ी।
क्या था विरोध का कारण !
प्रदर्शनकारी संगठनों का दावा है कि यह क्रिश्चियन मिशनरियों द्वारा कथित रूप से हिंदुओं को धर्मांतरण के लिए लुभाने के खिलाफ था। बजरंग दल के सदस्यों ने कहा कि क्रिसमस के बहाने गरीब हिंदुओं को ईसाई बनाया जा रहा है, और हनुमान चालीसा पाठ इसका शांतिपूर्ण विरोध है। उत्तर प्रदेश में एंटी-कन्वर्जन कानून का हवाला देते हुए उन्होंने पुलिस से शिकायत भी की। हालांकि, क्रिश्चियन समुदाय और मानवाधिकार संगठनों ने इसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ उत्पीड़न बताया, जो शांति के त्योहार को बाधित कर रहा है।
पुलिस और प्रशासन की भूमिका
बरेली में पुलिस ने प्रदर्शन को नियंत्रित किया और कोई हिंसा नहीं हुई। हिसार में पुलिस ने चर्च के आसपास सुरक्षा बढ़ाई और संभावित टकराव को रोका। असम और छत्तीसगढ़ में भी पुलिस जांच कर रही है, लेकिन कोई गिरफ्तारी की खबर नहीं।
सोशल मीडिया पर क्या है चर्चा !
कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे “हिंदू जागरण” बताया और बजरंग दल की सराहना की, दावा किया कि यह धर्मांतरण रोकने का तरीका है। कई ने इसे “बेरोजगार गुंडागर्दी” और “सांप्रदायिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने वाला” कहा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, USCIRF और HRW जैसे संगठनों को टैग कर ध्यान आकर्षित किया गया। कुछ ने चिंता जताई कि इससे विदेशों में रहने वाले हिंदुओं पर असर पड़ सकता है।
यह घटनाएं भारत में क्रिसमस के दौरान बढ़ते सांप्रदायिक तनाव को दर्शाती हैं, जहां एक तरफ धर्मांतरण के आरोप हैं, वहीं दूसरी तरफ अल्पसंख्यक अधिकारों की चिंता। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित रखा, लेकिन ऐसे प्रदर्शनों से सामाजिक सद्भाव प्रभावित हो सकता है। आगे की जांच और संवाद से ही समाधान संभव है।