प्रकाश मेहरा
दिल्ली डेस्क
नई दिल्ली:- नीट (यूजी) 2026 की पुनर्परीक्षा से पहले केंद्र सरकार द्वारा टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस तेज हो गई है। सरकार का तर्क है कि यह कदम पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाया गया है, लेकिन विपक्ष और कई विशेषज्ञ इसकी प्रभावशीलता पर सवाल उठा रहे हैं।
कांग्रेस नेता कार्ति चिदंबरम ने सरकार के फैसले पर तंज कसते हुए कहा, “वाकई टेलीग्राम पर पाबंदी लगाना पेपर लीक को रोकने के लिहाज से एक मास्टर स्ट्रोक है।” उनके इस बयान को सरकार की रणनीति पर कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है।
वहीं, टेलीग्राम मैसेंजर ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार के फैसले की आलोचना की। कंपनी ने लिखा, “आपको सभी शॉपिंग मॉल भी बंद कर देने चाहिए क्योंकि उनमें से किसी एक में चोरी हो सकती है। और सड़कें भी बंद कर देनी चाहिए क्योंकि मैंने सुना है कि कोई तेज़ रफ़्तार से गाड़ी चला रहा था।”
टेलीग्राम का कहना है कि “किसी प्लेटफॉर्म के संभावित दुरुपयोग के आधार पर पूरे मंच को बंद करना उचित समाधान नहीं है। आलोचकों का भी मानना है कि तकनीकी प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने के बजाय पेपर लीक के मूल कारणों और दोषियों पर कार्रवाई अधिक प्रभावी होगी।”
इस बीच, टेलीग्राम द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई होने वाली है, जिससे इस विवाद को नया कानूनी मोड़ मिल गया है।