प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली| सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को केंद्र सरकार की उस याचिका पर अहम सुनवाई हुई, जिसमें देशभर के विभिन्न हाईकोर्ट में लंबित सभी मामलों को एक साथ स्थानांतरित करने की मांग की गई है। ये मामले ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2026 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हैं।
एक समान कानून, एक ही मंच पर सुनवाई जरूरी
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में दलील दी कि यह एक केंद्रीय कानून है और इसकी संवैधानिक वैधता पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय के विचाराधीन है। ऐसे में अलग-अलग हाईकोर्ट में समान मुद्दों पर सुनवाई से विरोधाभासी फैसले आने का खतरा है। उन्होंने कहा कि “मामले को या तो किसी एक हाईकोर्ट में समेकित किया जाए या फिर सीधे सुप्रीम कोर्ट में ही सुना जाए।”
कानून में गंभीर संवैधानिक और चिकित्सीय खामियां
एक हाईकोर्ट में लंबित याचिका के याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दावा किया कि यह याचिका सबसे व्यापक है और स्वयं एक चिकित्सक द्वारा दायर की गई है। उनका कहना था कि संशोधन कानून केवल संवैधानिक रूप से ही नहीं, बल्कि चिकित्सीय आधार पर भी कमजोर है। हालांकि अदालत ने संकेत दिया कि वह याचिकाकर्ता की विशेषज्ञता और तर्कों पर विचार कर सकती है।
एक समान सुनवाई की जरूरत
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि “बेहतर होगा कि सभी संबंधित मामलों की सुनवाई एक ही मंच पर की जाए, ताकि अलग-अलग अदालतों के परस्पर विरोधी फैसलों से बचा जा सके।”
हाईकोर्ट स्तर पर इससे अलग दृष्टिकोण
सॉलिसिटर जनरल ने यह भी कहा कि “पहले से ही ऐतिहासिक फैसला NALSA बनाम भारत सरकार (National Legal Services Authority v. Union of India) मौजूद है, जिसने ट्रांसजेंडर अधिकारों को मान्यता दी थी। इसलिए हाईकोर्ट स्तर पर इससे अलग दृष्टिकोण अपनाना उचित नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने मामले में नोटिस जारी कर दिया है। अब केंद्र सरकार और अन्य पक्षों से जवाब मांगा जाएगा। इसके बाद यह तय किया जाएगा कि सभी याचिकाओं की सुनवाई एक साथ सुप्रीम कोर्ट में होगी या किसी अन्य उपयुक्त मंच पर भेजी जाएगी।
यह मामला ट्रांसजेंडर अधिकारों से जुड़े संवैधानिक प्रश्नों और नए संशोधन कानून की वैधता से संबंधित है। सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय न केवल कानूनी दिशा तय करेगा, बल्कि देश में ट्रांसजेंडर अधिकारों की व्याख्या और लागू करने की प्रक्रिया पर भी असर डालेगा।