प्रकाश मेहरा
इकोनॉमिक डेस्क
भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ी सकारात्मक खबर सामने आई है। चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर–दिसंबर) में देश की जीडीपी वृद्धि दर 7.8% दर्ज की गई है। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और अनिश्चितताओं के बावजूद यह प्रदर्शन मजबूत आर्थिक गतिविधियों का संकेत देता है। इससे पहले दूसरी तिमाही में विकास दर 7.6% और पहली तिमाही में 8.2% रही थी, जिससे स्पष्ट है कि अर्थव्यवस्था स्थिर गति से आगे बढ़ रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार विनिर्माण, सेवा क्षेत्र और निवेश गतिविधियों में सुधार इस तेज रफ्तार के प्रमुख कारण हैं। नई गणना पद्धति के तहत जारी आंकड़ों में जीएसटी डेटा, कॉर्पोरेट रिपोर्टिंग और डिजिटल लेनदेन जैसी आधुनिक आर्थिक गतिविधियों को भी शामिल किया गया है, जिससे जीडीपी का आकलन अधिक सटीक और व्यापक हो गया है।
सरकार ने पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर 8.6% रहने का अनुमान जताया है। नॉमिनल वृद्धि में महंगाई का प्रभाव भी शामिल होता है, इसलिए यह सरकारी राजस्व और टैक्स कलेक्शन के लिहाज से अहम माना जाता है। वहीं, राजकोषीय घाटा भी तय लक्ष्य के अनुरूप नियंत्रित स्तर पर है, जो वित्तीय प्रबंधन की संतुलित स्थिति को दर्शाता है।