प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली। उच्च शिक्षा में समानता और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाई गई यूजीसी की नई इक्विटी रेगुलेशन अब देशभर में तीखी बहस का विषय बन गई है। सोशल मीडिया से लेकर विश्वविद्यालय परिसरों और सड़कों तक, इस नियम को लेकर छात्रों के बीच असंतोष देखने को मिल रहा है। खासतौर पर जनरल कैटेगरी के छात्र इस रेगुलेशन को भेदभावपूर्ण बताते हुए विरोध जता रहे हैं।
इसी मुद्दे पर छात्रों की राय जानने के लिए सरल न्यूज़ की टीम जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) पहुँची। यहां छात्रों ने खुलकर अपनी बात रखी और कहा कि नई इक्विटी रेगुलेशन के नाम पर कुछ वर्गों के साथ अन्याय किया जा रहा है। छात्रों का आरोप है कि यह नियम मेरिट, अवसरों की समानता और निष्पक्ष प्रतियोगिता के सिद्धांतों को कमजोर करता है।
जेएनयू के छात्रों ने सवाल उठाया कि क्या समानता का अर्थ किसी एक वर्ग को पीछे धकेलना है। कई छात्रों का कहना है कि जातिगत आधार पर नीतियाँ बनाते समय सामाजिक और आर्थिक स्थिति को भी बराबर महत्व दिया जाना चाहिए। वहीं कुछ छात्रों ने इसे सामाजिक न्याय की दिशा में जरूरी कदम बताते हुए समर्थन भी किया, जिससे कैंपस में मतभेद साफ नजर आए।
नई इक्विटी रेगुलेशन की पुनः समीक्षा
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने यूजीसी से मांग की कि “नई इक्विटी रेगुलेशन की पुनः समीक्षा की जाए। सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट और संतुलित नियम बनाए जाएं। छात्रों से संवाद के बाद ही किसी बड़े बदलाव को लागू किया जाए। फिलहाल, यह मुद्दा सिर्फ जेएनयू तक सीमित नहीं है। देश के कई विश्वविद्यालयों में छात्र संगठन इसे लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। अब देखना होगा कि यूजीसी और शिक्षा मंत्रालय इस बढ़ते विरोध पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या नियमों में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं।