देश का सबसे बड़ा सूबा उत्तर प्रदेश अब सिर्फ़ आबादी और राजनीति के लिए नहीं, बल्कि रक्षा उत्पादन (Defence Manufacturing) के बड़े केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है। यूपी सरकार की महत्वाकांक्षी डिफेंस कॉरिडोर परियोजना के तहत राज्य तेज़ी से डिफेंस कैपिटल बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस कड़ी में अब राजधानी लखनऊ का नाम देश की सबसे घातक और अत्याधुनिक ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से जुड़ गया है।
200 एकड़ में फैला ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्लांट
लखनऊ में करीब 200 एकड़ भूमि पर स्थापित ब्रह्मोस एयरोस्पेस इंटीग्रेशन और मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में काम तेज़ी से प्रगति पर है। इस प्लांट में—
- ब्रह्मोस मिसाइल के प्रमुख कंपोनेंट्स का निर्माण
- इंटीग्रेशन और टेस्टिंग
- भविष्य में निर्यात के लिए मिसाइल असेंबली
जैसे अहम कार्य किए जाएंगे। यह परियोजना भारत और रूस की संयुक्त कंपनी BrahMos Aerospace द्वारा संचालित की जा रही है।
आखिर लखनऊ को ही क्यों चुना गया?
ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण के लिए लखनऊ को चुने जाने के पीछे कई रणनीतिक और व्यावहारिक कारण हैं— भौगोलिक और रणनीतिक स्थिति लखनऊ देश के मध्य भाग में स्थित है, जिससे लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा दोनों दृष्टि से यह एक सुरक्षित और उपयुक्त स्थान बनता है। डिफेंस कॉरिडोर का हिस्सा लखनऊ, यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के छह नोड्स में से एक है। यहां पहले से ही रक्षा उत्पादन से जुड़ा इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है।
मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर
- अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
- बेहतर सड़क और रेल नेटवर्क
- तकनीकी संस्थानों और स्किल्ड मैनपावर की उपलब्धता
निवेश के लिए अनुकूल नीतियां
उत्तर प्रदेश सरकार ने डिफेंस सेक्टर में निवेश के लिए—
- भूमि आवंटन
- टैक्स में छूट
- सिंगल विंडो क्लीयरेंस जैसी सुविधाएं दी हैं।
रोजगार और आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बढ़ावा
इस ब्रह्मोस यूनिट से—
- हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर
- स्थानीय MSME और स्टार्टअप्स को बढ़ावा
- मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती मिलेगी।
रक्षा ताकत के साथ नई पहचान
ब्रह्मोस मिसाइल को दुनिया की सबसे तेज़ सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिना जाता है। अब इसके निर्माण से जुड़कर—लखनऊ सिर्फ नवाबी शहर नहीं, बल्कि भारत की सामरिक शक्ति का प्रतीक भी बनेगा।