सरल डेस्क
खाड़ी देशों में जारी सैन्य संघर्ष का असर अब भारतीय नागरिकों पर भी दिखाई देने लगा है। कुवैत में काम कर रहे तमिलनाडु के एक भारतीय इलेक्ट्रीशियन की ईरानी मिसाइल के मलबे की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना क्षेत्र में बढ़ते तनाव और विदेशी कामगारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर रही है।
क्या है पूरा मामला
रिपोर्ट्स के अनुसार, कुवैत में एक पावर और वाटर डीसैलिनेशन प्लांट पर ईरानी मिसाइल हमले के दौरान गिरा मलबा एक भारतीय कामगार पर आ गिरा, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान तमिलनाडु के रहने वाले 37 वर्षीय संताना सेल्वम (Santhana Selvam) के रूप में हुई है, जो पिछले कई वर्षों से कुवैत में इलेक्ट्रीशियन के रूप में काम कर रहे थे।
कुवैत के बिजली और जल मंत्रालय ने पुष्टि की कि हमले में प्लांट की सर्विस बिल्डिंग को भारी नुकसान पहुंचा और एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई। घटना के तुरंत बाद तकनीकी और आपातकालीन टीमों को मौके पर भेजा गया, ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके और प्लांट का संचालन जारी रखा जा सके।
परिवार ने सरकार से लगाई मदद की गुहार
मृतक संताना सेल्वम तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले के रहने वाले थे और अपने पीछे पत्नी और दो बच्चों को छोड़ गए हैं। परिवार ने भारत सरकार से अपील की है कि शव को जल्द से जल्द भारत लाया जाए ताकि अंतिम संस्कार किया जा सके।
भारतीय दूतावास ने जताया दुख
कुवैत स्थित भारतीय दूतावास ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और कहा है कि वे कुवैती अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं और परिवार को हर संभव सहायता दी जाएगी।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता खतरा
खाड़ी क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के कारण मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे विदेशी कामगारों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल के दिनों में यूएई और अन्य खाड़ी देशों में भी मिसाइल मलबे से भारतीय नागरिकों की मौत की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीय कामगार खतरे में। मिसाइल और ड्रोन हमलों से नागरिक क्षेत्रों को नुकसान। भारत सरकार पर सुरक्षा और निकासी को लेकर दबाव। क्षेत्रीय तनाव का सीधा असर आम नागरिकों पर।
कुवैत में भारतीय इलेक्ट्रीशियन की मौत ने खाड़ी संघर्ष की भयावहता को उजागर कर दिया है। यह घटना बताती है कि युद्ध और तनाव का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों और प्रवासी कामगारों पर पड़ता है। अब सभी की नजर भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया पर टिकी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।