सरल डेस्क
मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और जंग के हालात ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुआ सैन्य संघर्ष अब धीरे-धीरे गल्फ देशों तक फैलता नजर आ रहा है। लगातार हो रहे हमलों और जवाबी कार्रवाई के कारण क्षेत्र में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं, जिससे वहां काम कर रहे लाखों भारतीयों की चिंता बढ़ गई है।
जंग बढ़ी, खतरा भी बढ़ा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान और अमेरिका-समर्थित सैन्य कार्रवाई के बाद पूरे मध्य पूर्व में हमले और जवाबी हमले जारी हैं। कई गल्फ देशों में ऊर्जा ठिकानों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है, जिससे सुरक्षा हालात बिगड़ते जा रहे हैं। इस जंग का असर तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है।
पश्चिमी देशों के नागरिक लौटे, भारतीय फंसे
गंभीर सुरक्षा हालात को देखते हुए कई पश्चिमी देशों ने अपने नागरिकों को गल्फ देशों और युद्ध प्रभावित क्षेत्रों से वापस बुला लिया है। लेकिन भारतीय नागरिकों की स्थिति अलग है। बड़ी संख्या में भारतीय कामगार और कर्मचारी अपनी नौकरी और रोजी-रोटी के कारण वहीं रहने को मजबूर हैं।
नौकरी और परिवार के बीच फंसे भारतीय
गल्फ देशों में काम करने वाले भारतीयों का कहना है कि वे डर और अनिश्चितता के माहौल में जी रहे हैं। एक तरफ जंग का खतरा है। दूसरी तरफ नौकरी छोड़ने पर परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ने का डर। फ्लाइट और वीजा की अनिश्चितता भी बड़ी समस्या है। ऐसे में भारतीय कामगारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है—जान बचाएं या नौकरी बचाएं।
सरकार से मदद की उम्मीद
विदेशों में रह रहे भारतीय अब भारत सरकार से सुरक्षा और आपातकालीन सहायता की उम्मीद कर रहे हैं। जरूरत पड़ने पर सुरक्षित निकासी (Evacuation) और दूतावास की मदद की मांग भी उठ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जंग लंबी चली तो गल्फ देशों में काम कर रहे लाखों भारतीयों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
अर्थव्यवस्था पर भी असर
मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के कारण तेल की कीमतें बढ़ने और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इससे भारत समेत कई देशों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। जंग के साये में गल्फ देशों में रह रहे भारतीयों की जिंदगी डर और मजबूरी के बीच गुजर रही है। उनके लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर नौकरी छोड़ी तो परिवार भूखा रहेगा, और अगर वहीं रहे तो जान का खतरा बना रहेगा। ऐसे हालात में भारतीय कामगारों की उम्मीद सिर्फ सरकार और हालात के जल्द सामान्य होने पर टिकी हुई है।