स्पोर्ट्स डेस्क
पूर्व क्रिकेटर और सांसद गौतम गंभीर ने अपनी पहचान के दुरुपयोग के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए Delhi High Court का रुख किया है। उन्होंने एआई तकनीक के जरिए बनाए जा रहे डीपफेक वीडियो, फेस-स्वैपिंग और वॉइस क्लोनिंग के मामलों पर गंभीर चिंता जताई है।
क्या है मामला ?
गंभीर का आरोप है कि कुछ अज्ञात लोग उनकी छवि, चेहरा और आवाज का गलत इस्तेमाल कर फर्जी वीडियो और कंटेंट बना रहे हैं। इन डीपफेक्स के जरिए लोगों को भ्रमित किया जा रहा है और उनकी साख को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
कोर्ट में क्या मांग की गई ?
गौतम गंभीर ने अपनी याचिका में ऐसे सभी फर्जी और भ्रामक कंटेंट को तुरंत हटाने की मांग की है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील की है। 2.5 करोड़ रुपये का हर्जाना भी मांगा है।
AI और डीपफेक का खतरा
आज के समय में AI तकनीक इतनी उन्नत हो चुकी है कि किसी की आवाज और चेहरा हूबहू कॉपी किया जा सकता है। इस वजह से फेक न्यूज फैलाने का खतरा बढ़ गया है। पब्लिक फिगर्स की छवि को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। आम लोगों के लिए भी साइबर खतरे बढ़ रहे हैं।
क्यों अहम है यह मामला ?
गौतम गंभीर का यह कदम सिर्फ उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों के खिलाफ एक बड़ी चेतावनी भी है। इससे आने वाले समय में डीपफेक और AI के दुरुपयोग पर सख्त नियम बनाने की दिशा में भी असर पड़ सकता है।