स्पेशल डेस्क
भारत और बांग्लादेश के बीच हालिया तनाव मुख्य रूप से बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों से उपजा है। 18 दिसंबर को बांग्लादेश के मयमेंसिंह जिले में हिंदू व्यक्ति दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या और उसके बाद शव को जलाने की है। यह घटना कथित ईशनिंदा के आरोप पर हुई, हालांकि बाद में जांच में कोई सबूत नहीं मिला।
इस घटना ने भारत में गुस्से की लहर पैदा की, क्योंकि इसे बांग्लादेश में हिंदुओं पर बढ़ते अत्याचारों का हिस्सा माना जा रहा है। बांग्लादेश में 2024 की क्रांति के बाद से स्थिति अस्थिर है, जहां पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाया गया था। अब मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के तहत भीड़ की हिंसा बढ़ी है, जिसमें हिंदू महिलाओं को सिंदूर पहनने पर परेशान किया जाना और अल्पसंख्यकों पर हमले शामिल हैं। इसके अलावा, बांग्लादेश में छात्र नेता शरीफ ओस्मान हादी की हत्या (12 दिसंबर को गोली मारी गई) और अन्य घटनाओं ने एंटी-इंडिया भावनाओं को भड़काया है।
दिल्ली में VHP का विरोध प्रदर्शन
कुछ समूह भारत पर बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का आरोप लगा रहे हैं, जिससे दोनों देशों में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। 23 दिसंबर को दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके में बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी दीपू चंद्र दास की हत्या के खिलाफ नारे लगा रहे थे, जैसे “बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार बंद करो” और “बांग्लादेश में राष्ट्रपति शासन लागू करो”। वे भगवा झंडे लहरा रहे थे, पोस्टर दिखा रहे थे और मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे।
प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की तीन लेयर वाली बैरिकेडिंग तोड़ दी और उच्चायोग की ओर बढ़ने की कोशिश की, जिससे पुलिस के साथ झड़प हुई। पुलिस ने लाठीचार्ज किया और पैरामिलिट्री फोर्सेस तैनात कीं। कई प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए। प्रदर्शन दोपहर से शाम तक चला, और उच्चायोग के आसपास भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई। अन्य शहरों में प्रदर्शन: कोलकाता में बांग्लादेश डिप्टी हाई कमीशन के बाहर विरोध, जहां पुलिस ने बैरिकेड्स तोड़ने पर रोक लगाई। भोपाल, हैदराबाद, जम्मू, राजौरी और सिलीगुड़ी में भी समान प्रदर्शन हुए, जहां हिंदू संगठनों ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की मांग की। सिलीगुड़ी में बांग्लादेश वीजा सेंटर पर तोड़फोड़ की घटना भी हुई।
ढाका में भारतीय उच्चायोग के बाहर स्थिति
दिल्ली में प्रदर्शनों के जवाब में या बढ़ते तनाव के कारण, ढाका में भारतीय उच्चायोग के बाहर सुरक्षा कड़ी कर दी गई। 23 दिसंबर तक बख्तरबंद गाड़ियां (armored vehicles) तैनात की गईं, साथ ही पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्सेस की भारी संख्या में मौजूदगी है। यह कदम जुलाई 2024 की क्रांति से जुड़े रैडिकल ग्रुप्स के मार्च के बाद उठाया गया, जहां प्रदर्शनकारी भारतीय उच्चायोग की ओर बढ़ रहे थे और एंटी-इंडिया नारे लगा रहे थे।
17-18 दिसंबर को “जुलाई 36 मंच” जैसे ग्रुप्स ने भारतीय उच्चायोग की ओर मार्च किया, बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की और पुलिस से झड़प हुई। वीडियो फुटेज में पुलिस रायट गियर में प्रदर्शनकारियों को रोकते दिखे, साथ ही बड़े पैमाने पर सुरक्षा बल तैनात। चटगांव और सिलहट में भी भारतीय असिस्टेंट हाई कमीशन और वीजा सेंटर्स पर सुरक्षा बढ़ाई गई, जहां सेना तैनात की गई।
उच्चायोग पर हमले की आशंका
बांग्लादेश में कुछ ग्रुप्स भारत पर उत्तर-पूर्व राज्यों को अलग करने की धमकी दे रहे हैं, और उच्चायोग पर हमले की आशंका जताई जा रही है। अमेरिकी दूतावास ने भी ढाका में सलाह जारी की। दोनों देशों की सरकारी प्रतिक्रियाए। बांग्लादेश में 23 दिसंबर को भारतीय राजदूत प्रणय वर्मा को तलब किया और दिल्ली व सिलीगुड़ी में अपने मिशनों पर हमलों की निंदा की।
दिल्ली में वीजा सेवाएं निलंबित कर दीं। अंतरिम सरकार ने हादी की हत्या की जांच का वादा किया और फरवरी 2026 में चुनाव की घोषणा की।केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने हिंसा की निंदा की। PDP की महबूबा मुफ्ती और अन्य नेताओं ने चिंता जताई। AIMSA ने PM मोदी से भारतीय छात्रों की सुरक्षा की मांग की। पूर्व राजनयिकों ने स्थिति को “खतरनाक” बताया। अमेरिकी सांसदों ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की मांग की। UN ने हिंसा पर चिंता जताई। वहीं अब तनाव चरम पर है, दोनों देशों में सुरक्षा बढ़ाई गई है। भारत में प्रदर्शन जारी हैं, जबकि बांग्लादेश में एंटी-इंडिया सेंटिमेंट्स बढ़ रहे हैं। भारतीय छात्र बांग्लादेश में खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।