बिहार डेस्क
पटना: बिहार की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने राज्यसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया। उनके इस फैसले के बाद Janata Dal (United) यानी जेडीयू के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी कार्यकर्ताओं ने पटना स्थित जेडीयू कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन करते हुए प्रदेश अध्यक्ष Umesh Kushwaha का घेराव किया और फैसले पर नाराजगी जताई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता जेडीयू कार्यालय के बाहर इकट्ठा हुए और नारेबाजी करने लगे। कार्यकर्ताओं का कहना था कि नीतीश कुमार ने बिहार की जनता के बीच मुख्यमंत्री के चेहरे पर वोट मांगे थे, ऐसे में उनका राज्यसभा जाने का फैसला कार्यकर्ताओं और मतदाताओं की भावना के खिलाफ है। इस दौरान स्थिति कुछ देर के लिए तनावपूर्ण भी हो गई, जब प्रदर्शनकारियों ने प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा से जवाब मांगते हुए उनका घेराव कर लिया।
नीतीश कुमार के नेतृत्व पर भरोसा
विरोध सिर्फ पटना तक ही सीमित नहीं रहा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पैतृक गांव कल्याण बिगहा में भी लोगों ने नाराजगी जाहिर की। गांव के कई स्थानीय लोगों का कहना है कि बिहार की जनता ने नीतीश कुमार के नेतृत्व पर भरोसा करके उन्हें समर्थन दिया था। ऐसे में अगर वे राज्यसभा चले जाते हैं तो इससे जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर सकती है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि “नीतीश कुमार के इस कदम से जेडीयू के भीतर असंतोष और बढ़ सकता है। हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेता फिलहाल इस पूरे विवाद पर खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे पर कार्यकर्ताओं को समझाने की कोशिश कर सकता है। फिलहाल जेडीयू के अंदर उठे इस विरोध ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी नेतृत्व इस नाराजगी को किस तरह संभालता है और आगे की रणनीति क्या तय की जाती है।