सरल डेस्क
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 20 दिसंबर को पुणे में सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के 22वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए वैश्विक उथल-पुथल और बदलते पावर डायनामिक्स पर महत्वपूर्ण बयान दिया।पावर के मायने बदल गए हैं जयशंकर ने कहा कि ‘दुनिया की आर्थिक और राजनीतिक ताकत का क्रम (global pecking order) अब पूरी तरह बदल चुका है। पहले की तरह एक या दो केंद्रों से शक्ति नहीं चलती, बल्कि अब कई केंद्र (multiple centres of power and influence) उभर चुके हैं।
शक्ति की जटिलता बढ़ी
पावर को समझना अब पहले से ज्यादा जटिल हो गया है, क्योंकि इसमें व्यापार, ऊर्जा, सैन्य क्षमता, प्राकृतिक संसाधन, तकनीक और मानव प्रतिभा जैसे कई आयाम शामिल हैं। कोई देश अपनी मर्जी नहीं थोप सकता उन्होंने स्पष्ट कहा कि “कोई देश कितना भी ताकतवर क्यों न हो, सभी मुद्दों पर अपनी बात नहीं थोप सकता” (No country, however powerful, can impose its will on all issues)। वैश्विक शक्तियां अब “यूनिवर्सल” नहीं रह गई हैं।
इस बदलाव से देशों के बीच स्वाभाविक प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, जो एक नया प्रभाव और संतुलन पैदा कर रही है। 80 साल पुरानी वैश्विक व्यवस्था उखड़ रही उन्होंने कहा कि “द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी वैश्विक व्यवस्था (global order established 80 years ago) स्पष्ट रूप से उखड़ रही है (unravelling)।
तकनीकी बदलावों के साथ कदम
बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश जैसे भारत को तकनीकी बदलावों के साथ कदम मिलाने के लिए आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करनी चाहिए। यह बयान वर्तमान वैश्विक अस्थिरता (जैसे यूएस-चाइना टेंशन, यूरोप की चुनौतियां) के संदर्भ में देखा जा रहा है, जहां बहुध्रुवीय विश्व (multipolar world) की ओर बढ़त स्पष्ट है। जयशंकर ने यह भी जोर दिया कि ‘दुनिया बड़े आर्थिक-पॉलिटिकल बदलावों के दौर से गुजर रही है।