उत्तराखंड डेस्क
देहरादून: हरीश रावत के ‘राजनीतिक व्रत’ वाले बयान के बाद इंडियन नेशनल कांग्रेस की उत्तराखंड इकाई में सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं और बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। इससे संगठन के भीतर गुटबाजी की चर्चा तेज हो गई है।
क्या है पूरा मामला !
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हाल ही में सोशल मीडिया के माध्यम से 15 दिन के ‘राजनीतिक व्रत’ पर जाने की बात कही। उन्होंने संकेत दिया कि वे कुछ समय तक सक्रिय राजनीति से दूरी बनाकर आत्ममंथन करेंगे। उनके इस बयान को पार्टी के अंदर चल रही खींचतान और नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। हरीश रावत के इस कदम के बाद कांग्रेस नेताओं के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं, जिससे विवाद और बढ़ गया।
नेताओं के बीच बढ़ी तकरार
हरीश रावत के बयान के बाद वरिष्ठ नेता हरक सिंह रावत ने पार्टी में व्यक्तिगत प्रभाव और नेतृत्व को लेकर टिप्पणी की। इसके जवाब में विधायक हरीश धामी ने तीखी प्रतिक्रिया दी और 2016 के राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए हरक सिंह रावत पर निशाना साधा।इस बयानबाजी के बाद कांग्रेस के अंदर गुटों की लड़ाई खुलकर सामने आ गई है, जिससे पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कांग्रेस के लिए बढ़ी चुनौती
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि “पार्टी में अंदरूनी मतभेद बढ़ रहे हैं। नेतृत्व को लेकर असहमति सामने आ रही है। आगामी चुनाव से पहले संगठन को एकजुट रखना बड़ी चुनौती है। विपक्ष को कांग्रेस पर हमला करने का मौका मिल रहा है।”
चुनाव पर पड़ सकता है असर
उत्तराखंड में आने वाले चुनावों को देखते हुए यह विवाद कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बन सकता है। अगर समय रहते पार्टी नेतृत्व ने स्थिति को नहीं संभाला, तो इसका असर कार्यकर्ताओं और मतदाताओं पर भी पड़ सकता है। हरीश रावत के ‘राजनीतिक व्रत’ वाले बयान ने उत्तराखंड कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को उजागर कर दिया है। नेताओं के बीच चल रही बयानबाजी से यह साफ है कि पार्टी के अंदर मतभेद गहराते जा रहे हैं। अब सभी की नजर कांग्रेस नेतृत्व पर है कि वह इस विवाद को कैसे सुलझाता है और संगठन को एकजुट रखने में कितना सफल होता है।