प्रकाश मेहरा। स्पेशल डेस्क
बांग्लादेश में 12 फरवरी को हुए संसदीय चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने भारी बहुमत हासिल किया है। यह चुनाव 2024 के छात्र-आंदोलन के बाद पहला बड़ा चुनाव था, जिसमें शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। BNP के नेता तारिक रहमान अब प्रधानमंत्री बनने की राह पर हैं, जो देश की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। इस रिपोर्ट में हम चुनाव के नतीजों, BNP की जीत से होने वाले बदलावों और इसका पश्चिम बंगाल व असम के 2026 चुनावों पर असर पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
दो-तिहाई बहुमत से BNP की जीत
BNP ने 300 सीटों वाली संसद में 209 से 212 सीटें जीतीं, जो दो-तिहाई बहुमत से अधिक है। चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, BNP गठबंधन ने 297 घोषित सीटों में से 209 सीटें हासिल कीं। यह पार्टी की 2001 के बाद सबसे बड़ी जीत है, जब उसने 193 सीटें जीती थीं। तारिक रहमान, जो 17 साल लंदन में निर्वासन में थे, अब प्रधानमंत्री बनेंगे।अन्य पार्टियां जमात-ए-इस्लामी ने 68-70 सीटें जीतीं, जो दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई।
नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP), जो 2024 आंदोलन से निकली, ने 6 सीटें जीतीं। अवामी लीग, शेख हसीना की पार्टी, चुनाव से बाहर थी क्योंकि उसे अयोग्य घोषित किया गया था। मतदान प्रतिशत 59.44% रहा। यह चुनाव मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के बाद हुआ, जो 2024 के विद्रोह के बाद बनी थी। चुनाव में हिंसा के बावजूद शांतिपूर्ण रहा, लेकिन अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमलों की रिपोर्ट्स आईं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान से बात की और BNP को बधाई दी। अमेरिका, पाकिस्तान और चीन ने भी बधाई दी।
BNP की जीत से क्या बदलेगा ?
BNP की जीत बांग्लादेश की राजनीति, अर्थव्यवस्था और विदेश नीति में कई बदलाव ला सकती है। राजनीतिक बदलाव BNP की वापसी पार्टी 20 साल बाद सत्ता में लौट रही है। यह अवामी लीग और BNP के बीच पुराने द्वंद्व को पुनर्जीवित कर सकता है, लेकिन छात्र आंदोलन की मांगों (जैसे दो-टर्म सीमा, महिलाओं का अधिक प्रतिनिधित्व) को लागू करने का वादा है। जमात की सीटें बढ़ीं, जो इस्लामी कट्टरता से जुड़ी है। BNP जमात के साथ गठबंधन कर सकती है, जो अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल उठा सकता है। हालांकि, BNP को जमात से बेहतर माना जा रहा है क्योंकि यह अधिक उदार है।
अर्थव्यवस्था और शासन…आर्थिक स्थिरता
BNP ने आर्थिक संकट (महंगाई, बेरोजगारी) पर फोकस किया। नई सरकार को यूनुस सरकार की विरासत संभालनी होगी, जिसमें आर्थिक सुधार शामिल हैं। हसीना के जाने के बाद हिंदुओं पर 2,000+ हमले हुए, 23 मौतें। रहमान ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का वादा किया है, लेकिन BNP की पुरानी जमात से निकटता चिंता का विषय है। भारत से रिश्ते BNP भारत के साथ “समानता और पारस्परिक हित” पर आधारित संबंध चाहती है।
मोदी की बधाई से रिश्तों में सुधार की उम्मीद है, लेकिन सीमा सुरक्षा, पानी बंटवारा (तीस्ता, गंगा संधि 2026 में समाप्त) जैसे मुद्दे चुनौतीपूर्ण रहेंगे। अन्य देश: पाकिस्तान और चीन से निकटता बढ़ सकती है, लेकिन BNP संतुलित दृष्टिकोण अपनाएगी। बंगाल-असम चुनावों पर असर पश्चिम बंगाल और असम में 2026 के विधानसभा चुनाव (मार्च-मई) होने वाले हैं। बांग्लादेश के नतीजे इन चुनावों को प्रभावित करेंगे, क्योंकि दोनों राज्य बांग्लादेश से सटे हैं (4,100 किमी सीमा)।
प्रवासन और जनसांख्यिकी
BJP बांग्लादेश को “अवैध घुसपैठ” का प्रतीक बनाकर चुनाव लड़ती है, जबकि TMC इसे “सांस्कृतिक गलतफहमी” बताती है। BNP की जीत से अगर सीमा सुरक्षा मजबूत हुई, तो BJP का नैरेटिव कमजोर हो सकता है। ममता बनर्जी ने BNP को बधाई दी और “मित्रतापूर्ण संबंध” की उम्मीद जताई।
हिंदू अल्पसंख्यक मुद्दा
बांग्लादेश में हमलों से बंगाल के मुस्लिम-हिंदू वोटर प्रभावित हो सकते हैं। मुस्लिम वोटर (30%+) TMC के पक्ष में हैं, लेकिन BJP हिंदू सुरक्षा पर फोकस करेगी। पानी बंटवारा तीस्ता समझौता बंगाल सरकार के विरोध से अटका है। BNP सरकार दबाव डाल सकती है, जो चुनावी मुद्दा बनेगा।
असम में “असमिया पहचान” का मुद्दा
असम में “असमिया पहचान” का मुद्दा प्रमुख है। बांग्लादेश से “घुसपैठ” पर BJP सख्त है। BNP की जीत से अगर उग्रवादियों को समर्थन मिला (BNP की पुरानी छवि), तो सुरक्षा चिंताएं बढ़ेंगी। असम में अवैध प्रवासन, ड्रग्स तस्करी जैसे मुद्दे चुनावी हैं। BNP अगर सख्ती दिखाए, तो BJP को फायदा; जमात का प्रभाव बढ़ा तो चिंता। पूर्वोत्तर राज्य असुरक्षा से प्रभावित होते हैं। BNP जीत को भारत “कम बुरा विकल्प” मान रहा है, लेकिन पाकिस्तान-चीन प्रभाव बढ़ने से तनाव।
अब क्या होगा आगे ?
BNP की जीत बांग्लादेश को स्थिरता दे सकती है, लेकिन जमात का उदय और अवामी लीग की अनुपस्थिति चुनौतियां हैं। भारत के लिए यह “रीसेट” का मौका है, लेकिन सीमा, अल्पसंख्यक और पानी मुद्दों पर सतर्क रहना होगा। बंगाल-असम चुनावों में बांग्लादेश मुद्दा प्रमुख बनेगा, जो BJP को हिंदू सुरक्षा पर और TMC/BJP को क्षेत्रीय पहचान पर फोकस करने का मौका देगा। कुल मिलाकर, BNP सरकार भारत के साथ सकारात्मक संबंध बना सकती है, लेकिन व्यावहारिक क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।