स्पेशल डेस्क
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिंगापुर में भारतीय डायस्पोरा (प्रवासी भारतीय समुदाय) को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर को भारत की संस्कृति, मर्यादा और आस्था का मजबूत प्रतीक बताया।मुख्य बिंदु उनकी बातों से:सीएम योगी ने कहा कि अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर का निर्माण केवल एक मंदिर नहीं है, बल्कि यह भारत की मर्यादा का एहसास हर भारतवासी को कराता है।
उन्होंने राम मंदिर को भारत की सनातन परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ा। उन्होंने अन्य धार्मिक स्थलों का भी जिक्र किया काशी विश्वनाथ धाम को भारत की शाश्वत चेतना का जीवंत उदाहरण बताया। मथुरा-वृंदावन को भारत की भक्ति और समरसता का प्रतीक कहा, जहां भक्ति का भाव देखा जा सकता है।
उन्होंने भारत की समरसता पर जोर देते हुए कहा कि पर्व-त्योहारों में भारत की एकता और समरसता दिखती है। प्रयागराज (संगम) में करोड़ों लोगों की आस्था की डुबकी इसका उदाहरण है। कुछ लोग भारत में भेदभाव की बात करते हैं, लेकिन समरसता देखनी हो तो प्रयागराज आइए—ऐसा उन्होंने कहा।
भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत पर फोकस
यह संबोधन सिंगापुर दौरे के दौरान हुआ, जहां योगी आदित्यनाथ निवेश आकर्षित करने, उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने और भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत पर फोकस कर रहे हैं। वे ‘नया भारत’ की ताकत दिखाने और जल्द दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की बात कर रहे हैं। यह दौरा सिंगापुर (23-24 फरवरी) से शुरू होकर जापान तक जाएगा, जहां भी जय श्री राम के नारे और सांस्कृतिक स्वागत की खबरें हैं।
राम मंदिर को वे बार-बार भारत की सांस्कृतिक आत्मा, आस्था और गौरव का प्रतीक बताते रहे हैं, जैसा कि पहले अयोध्या में ध्वजारोहण आदि मौकों पर भी कहा गया था। सिंगापुर में यह बयान प्रवासी भारतीयों को भारत की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने और गर्व महसूस कराने के लिए था।