नई दिल्ली
संसद के शीतकालीन सत्र में लोकसभा ने भारी हंगामे के बीच विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल, 2025 (संक्षिप्त नाम VB-G RAM G बिल) को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इसे सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ‘जी राम जी’ बिल कहा जा रहा है, क्योंकि इसका एक्रोनिम “G RAM G” “जी राम जी” जैसा लगता है।
बिल क्या है ?
यह बिल 20 साल पुरानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा/MGNREGA) की जगह लेगा। ग्रामीण परिवारों को हर साल 125 दिनों (पहले 100 दिन थे) की अकुशल मजदूरी की कानूनी गारंटी। राज्यों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी, पारदर्शिता के लिए टेक्नोलॉजी का ज्यादा इस्तेमाल। विकसित भारत 2047 विजन के तहत ग्रामीण विकास, जल संरक्षण, परिसंपत्ति निर्माण और आजीविका मजबूत करना।बिल केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पेश किया और जवाब दिया।
हंगामा और विपक्ष का विरोध क्यों ?
विपक्ष (खासकर कांग्रेस, DMK, SP आदि) का मुख्य आरोप: महात्मा गांधी का नाम हटाना राष्ट्रपिता का अपमान है। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने इसे मनरेगा को खत्म करने की साजिश बताया। बिल पास होते ही विपक्षी सांसद वेल में पहुंचे, नारे लगाए (“महात्मा गांधी अमर रहें”, सरकार मुर्दाबाद आदि)। कई सांसदों ने बिल की कॉपियां फाड़ीं और स्पीकर की कुर्सी या मंत्री की ओर फेंक दीं।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने नाराजगी जताई “जनता ने आपको कागज फाड़ने के लिए नहीं भेजा है।” हंगामा इतना बढ़ा कि सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर पलटवार किया: “लोकतंत्र को भीड़तंत्र बना रहे हैं”, और कहा कि बिल गांधीजी के रामराज्य के विचार से प्रेरित है।
मनरेगा का आधुनिक संस्करण
सरकार का कहना “यह मनरेगा का आधुनिक संस्करण है, रोजगार दिन बढ़ाए गए, भ्रष्टाचार कम होगा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। पहले 14 घंटे से ज्यादा बहस हुई, 98 सांसदों ने हिस्सा लिया। विपक्ष की मांग (बिल को स्टैंडिंग कमिटी भेजने की) खारिज कर दी गई। यह बिल अब राज्यसभा में जाएगा। विपक्ष ने इसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा बनाया है, जबकि सरकार इसे विकासोन्मुख कदम बता रही है।