स्पेशल डेस्क
बांग्लादेश में हाल ही में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं, जिसके बाद भारत ने कड़ी चेतावनी जारी की है। दिसंबर 2025 में दो प्रमुख घटनाएं सामने आईं, जहां दो हिंदू व्यक्तियों की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई।
दीपू चंद्र दास की हत्या (18-19 दिसंबर) मयमनसिंह जिले के भालुका इलाके में 27-29 वर्षीय दीपू चंद्र दास (गारमेंट फैक्ट्री कर्मचारी) पर कथित ईशनिंदा (ब्लास्फेमी) का आरोप लगाकर उन्मादी भीड़ ने उन्हें पीट-पीटकर मार डाला। इसके बाद शव को पेड़ से लटकाया गया और आग लगा दी गई। पुलिस जांच में ईशनिंदा के आरोप की पुष्टि नहीं हुई। इस घटना की व्यापक निंदा हुई, और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार (मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में) ने इसे जघन्य अपराध बताया। कई गिरफ्तारियां हुईं।
सांस्कृतिक संस्थानों और अल्पसंख्यकों को निशाना
अमृत मंडल (सम्राट) की हत्या (24-25 दिसंबर ) राजबाड़ी जिले के पंशा उपजिले में 29 वर्षीय अमृत मंडल पर रंगदारी (एक्सटॉर्शन) के आरोप लगाकर स्थानीय लोगों की भीड़ ने उन्हें पीट-पीटकर मार डाला। पुलिस ने इसे आपराधिक गिरोह से जुड़ा मामला बताया, लेकिन यह हिंदू अल्पसंख्यक पर दूसरी लगातार हमला थी। ये घटनाएं बांग्लादेश में चल रही अशांति का हिस्सा हैं, जो छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या (गोली लगने से मौत) के बाद भड़की। इसके बाद कट्टरपंथी समूहों ने मीडिया, सांस्कृतिक संस्थानों और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया।
भारत की प्रतिक्रिया और चेतावनी
26 दिसंबर को विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बयान जारी कर कहा “बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों (हिंदू, ईसाई, बौद्ध) के खिलाफ चरमपंथियों द्वारा निरंतर शत्रुता गंभीर चिंता का विषय है। हालिया हिंदू युवक की हत्या की हम कड़ी निंदा करते हैं और उम्मीद करते हैं कि दोषियों को सजा मिलेगी।” उन्होंने जोड़ा कि ऐसी हिंसा को “मीडिया अतिशयोक्ति” या “राजनीतिक हिंसा” कहकर खारिज नहीं किया जा सकता – इसे नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
अंतरिम सरकार के कार्यकाल में स्वतंत्र स्रोतों से 2,900 से अधिक अल्पसंख्यकों पर हमलों की घटनाएं दर्ज हुईं। भारत ने बांग्लादेश के झूठे नैरेटिव को खारिज किया और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की मांग की। इससे पहले दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजदूतों को तलब किया, प्रदर्शनों और मिशनों की सुरक्षा को लेकर। भारत में वीएचपी, बजरंग दल आदि ने बांग्लादेश मिशनों के बाहर बड़े प्रदर्शन किए।
बांग्लादेश ने क्या दी की प्रतिक्रिया
अंतरिम सरकार ने दोनों हत्याओं की निंदा की और कहा कि ऐसी हिंसा के लिए जगह नहीं है। कुछ घटनाओं को “अलग-थलग” बताया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यक सुरक्षा पर सवाल उठे। यह मामला भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव बढ़ा रहा है। भारत लगातार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर जोर दे रहा है।