विशेष डेस्क
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और जंग जैसे हालात के बीच ईरान ने एक बड़ा रणनीतिक दांव चला है। तेहरान ने गल्फ देशों को नया सुरक्षा और सैन्य गठबंधन बनाने का प्रस्ताव दिया है, जिसमें अमेरिका और इजरायल को बाहर रखने की बात कही गई है। ईरान का कहना है कि यह गठबंधन क्षेत्रीय आत्मनिर्भरता और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बनाया जाएगा, ताकि मिडिल ईस्ट के देश अपनी सुरक्षा खुद संभाल सकें और बाहरी ताकतों पर निर्भरता कम हो सके।
सूत्रों के मुताबिक, तेहरान ने सऊदी अरब, कतर, यूएई, कुवैत, ओमान और बहरीन जैसे गल्फ देशों के सामने यह प्रस्ताव रखा है। ईरान का मानना है कि अगर क्षेत्रीय देश मिलकर सुरक्षा व्यवस्था बनाते हैं, तो मिडिल ईस्ट में स्थिरता आएगी और बाहरी दखल कम होगा।
आइसोलेट करने की रणनीति
ईरान की इस पहल को US और इजरायल को आइसोलेट करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेहरान लंबे समय से अमेरिका की सैन्य मौजूदगी और इजरायल के प्रभाव को कम करना चाहता है, और यह नया गठबंधन उसी दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर गल्फ देशों की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कई विश्लेषकों का मानना है कि सऊदी अरब और यूएई जैसे देश अमेरिका के करीबी सहयोगी हैं, इसलिए इस तरह के गठबंधन पर सहमति बनाना आसान नहीं होगा।
सबकी नजर गल्फ देशों के फैसले पर
मिडिल ईस्ट में पहले से ही ईरान और इजरायल के बीच तनाव, गाजा युद्ध और क्षेत्रीय संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में ईरान का यह प्रस्ताव आने वाले समय में नई भू-राजनीतिक हलचल पैदा कर सकता है। अगर यह गठबंधन बनता है, तो मिडिल ईस्ट की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है और अमेरिका-इजरायल की भूमिका पर भी असर पड़ सकता है। अब सबकी नजर गल्फ देशों के फैसले पर है कि वे ईरान के इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं या नहीं।