स्पेशल डेस्क
बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले के भालुका उपजिला में 18 दिसंबर की रात को एक हिंदू युवक की नृशंस हत्या हुई। पीड़ित का नाम दीपू चंद्र दास (उम्र लगभग 28-30 साल) था, जो एक गारमेंट फैक्ट्री में काम करता था और दुबालिया पारा इलाके में किराए के मकान में रहता था। स्थानीय लोगों ने दीपू पर पैगंबर मुहम्मद के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया (ईशनिंदा का आरोप)।
रात करीब 9 बजे एक उत्तेजित भीड़ ने उसे घेर लिया और बुरी तरह पीटा, जिससे उसकी मौत हो गई। मौत के बाद भीड़ ने उसके शव को नग्न अवस्था में एक पेड़ से बांधा (या लटकाया) और आग लगा दी। पुलिस ने घटना की पुष्टि की है। भालुका थाने के ड्यूटी अधिकारी रिपन मिया ने बताया कि शव को पोस्टमॉर्टम के लिए मयमनसिंह मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया है। अभी तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है, लेकिन जांच चल रही है और आरोपियों की तलाश की जा रही है।
बांग्लादेश में हिंसक प्रदर्शन
यह घटना बांग्लादेश में चल रहे बड़े अशांति के बीच हुई है। छात्र नेता और 2024 के आंदोलन के प्रमुख चेहरे शरीफ उस्मान हादी की मौत (सिंगापुर में इलाज के दौरान) के बाद पूरे देश में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने मीडिया हाउस (प्रथम आलो, डेली स्टार), अवामी लीग के दफ्तर और अन्य जगहों पर आगजनी की। इस अराजकता में अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़ गए हैं।
अंतरिम सरकार की प्रतिक्रिया
मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने इस हत्या की कड़ी निंदा की है। बयान में कहा गया “नए बांग्लादेश में ऐसी हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। इस जघन्य अपराध के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।” सरकार ने नागरिकों से हिंसा और उकसावे का विरोध करने की अपील की। अन्य प्रतिक्रियाएं भारत में बीजेपी और अन्य संगठनों ने इसकी निंदा की है।
मानवाधिकार समूहों और अल्पसंख्यक नेताओं ने इसे अल्पसंख्यकों की असुरक्षा का उदाहरण बताया। सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें वायरल हुईं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ी। यह घटना बांग्लादेश में धार्मिक आधार पर mob violence की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाती है, खासकर राजनीतिक अस्थिरता के समय।