अनिल गुप्ता
स्पेशल डेस्क
उत्तर प्रदेश–उत्तराखंड सीमा पर उत्तराखंड पुलिस द्वारा कड़े सुरक्षा इंतज़ामों के बीच शिवशक्ति धाम डासना के पीठाधीश्वर एवं श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी को हरिद्वार प्रवेश से रोक दिया गया। वे यूजीसी एक्ट के विरोध में संत समाज के मौन के खिलाफ हरिद्वार के सर्वानंद घाट पर एक दिन का सांकेतिक उपवास करने जा रहे थे।
महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी जी महाराज अपने साथ वर्ल्ड रिलिजियस कन्वेंशन की मुख्य संयोजक डॉ. उदिता त्यागी, अपने शिष्य यति रणसिंहानंद जी, यति अभयानंद जी, यति धर्मानंद जी, साथ ही मोहित बजरंगी और डॉ. योगेन्द्र योगी के साथ हरिद्वार जा रहे थे। लेकिन उत्तराखंड पुलिस ने उन्हें सीमा पर ही रोक दिया। इस कार्रवाई को महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी ने अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया और कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि भारी पुलिस बल के सामने उनकी और उनके शिष्यों की एक न चल सकी।
संत समाज के नाम मार्मिक अपील
महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी का कहना है कि यूजीसी एक्ट हिंदू समाज को तोड़ने वाला कानून है और इसे वे “हिंदुओं का डेथ वारंट” मानते हैं। उनका आरोप है कि यह एक्ट हिंदू समाज में जातीय विभाजन पैदा कर देश को बड़े संकट की ओर ले जा सकता है। उन्होंने संत समाज से इस कानून के खिलाफ खुलकर सामने आने की अपील की।
उत्तर प्रदेश–उत्तराखंड बॉर्डर से ही उन्होंने संत समाज के नाम मार्मिक अपील करते हुए कहा कि इतने बड़े मुद्दे पर संत समाज का मौन रहना सनातन धर्म के लिए महाविनाश का संकेत है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते विरोध नहीं हुआ तो यह कानून हिंदू समाज को आपसी संघर्ष में झोंक सकता है।
यूजीसी एक्ट को लेकर विरोध और समर्थन
महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी ने यह भी कहा कि इससे पहले 23 जनवरी, बसंत पंचमी के दिन वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर इसी यूजीसी एक्ट के विरोध में प्राणदान करने जा रहे थे, लेकिन गाजियाबाद पुलिस ने शिवशक्ति धाम डासना को छावनी में बदलकर उन्हें मंदिर परिसर में ही नजरबंद कर दिया था। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर संत समाज और हिंदू संगठनों में चर्चाएं तेज़ हो गई हैं, वहीं यूजीसी एक्ट को लेकर विरोध और समर्थन की बहस लगातार गहराती जा रही है।