प्रकाश मेहरा
स्पेशल डेस्क
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर में प्राप्त चढ़ावे के कथित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग वाली जनहित याचिका (पीआईएल) पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। अवकाशकालीन पीठ के न्यायमूर्ति पंकज भाटिया और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय ने सोमवार को कहा कि मामले में ऐसी कोई असाधारण या तात्कालिक परिस्थिति नहीं है, जिसके आधार पर इसे निर्धारित क्रम से हटाकर प्राथमिकता के आधार पर सुना जाए।
अदालत से तत्काल सुनवाई का अनुरोध
याचिकाकर्ता मोहित अशोक ने अदालत से तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था। इस पर पीठ ने कहा कि अदालत के समक्ष पहले से बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं और इस याचिका को विशेष प्राथमिकता देने का कोई पर्याप्त आधार नहीं है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी मौखिक रूप से उल्लेख किया कि राज्य सरकार इस मामले में पहले ही संज्ञान ले चुकी है और आवश्यक कदम उठा रही है। इसलिए तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं दिखती।
प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी
याचिका में राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे की राशि के कथित गबन तथा वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही मंदिर के वित्तीय लेन-देन का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) से विशेष ऑडिट कराने की भी मांग की गई है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि मंदिर निधि के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी रही है, जिसके कारण न्यायिक जांच आवश्यक है।
हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि तत्काल सुनवाई से इनकार करने का अर्थ याचिका के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी करना नहीं है। अब मामले की सुनवाई न्यायालय की निर्धारित सूची और क्रम के अनुसार की जाएगी।