स्पेशल डेस्क
अयोध्या। अयोध्या स्थित राम मंदिर में प्राप्त चढ़ावे के प्रबंधन और उसमें कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। तीन सदस्यीय एसआईटी ने मंगलवार को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) तथा मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद को उपलब्ध करा दी।
हालांकि जांच प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है और एसआईटी को अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में लगभग सात दिन और लग सकते हैं। अंतिम रिपोर्ट में जांच के सभी पहलुओं, तथ्यों और निष्कर्षों को विस्तार से शामिल किए जाने की संभावना है।
वरिष्ठ अधिकारियों की टीम कर रही है जांच
राज्य सरकार द्वारा गठित इस एसआईटी का नेतृत्व लखनऊ मंडल के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे हैं। टीम में लखनऊ रेंज की पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) किरण एस तथा वर्ष 2008 बैच के आईपीएस अधिकारी नीलरतन कुमार भी शामिल हैं।
एसआईटी को मंदिर में प्राप्त चढ़ावे, उसके लेखा-जोखा, प्रबंधन और उससे संबंधित विभिन्न आरोपों की जांच का दायित्व सौंपा गया है। जांच के दौरान संबंधित दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का भी परीक्षण किया जा रहा है।
कैसे शुरू हुआ विवाद ?
राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का मामला उस समय सुर्खियों में आया जब 7 जून को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि “मंदिर के चढ़ावे से जुड़े करोड़ों रुपये का हिसाब स्पष्ट नहीं है और धनराशि के दुरुपयोग की आशंका है।”
उनके इस आरोप के बाद राजनीतिक हलकों में बहस शुरू हो गई और मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया। विपक्षी दलों ने भी पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
सरकार ने गठित की एसआईटी
मामले के तूल पकड़ने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी के गठन की घोषणा की। सरकार का कहना है कि जांच का उद्देश्य तथ्यों की पुष्टि करना और जनता के बीच किसी भी प्रकार की शंका को दूर करना है।
राज्य सरकार के अनुसार, एसआईटी गठित करने की अनुशंसा स्वयं Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust द्वारा की गई थी। ट्रस्ट ने आरोपों के सामने आने के बाद मामले की स्वतंत्र जांच का समर्थन किया ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।
क्या है राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ?
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन वर्ष 2019 में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर आए सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद केंद्र सरकार द्वारा किया गया था। ट्रस्ट को राम मंदिर के निर्माण, मंदिर परिसर के विकास, दान और चढ़ावे के प्रबंधन सहित विभिन्न प्रशासनिक एवं वित्तीय जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में बड़ी मात्रा में चढ़ावा और दान दिया जाता है, जिसके कारण वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शिता का मुद्दा विशेष महत्व रखता है।
ट्रस्ट ने आरोपों को किया खारिज
ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय ने चढ़ावे में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या वित्तीय अनियमितता के आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि ट्रस्ट के सभी वित्तीय लेन-देन निर्धारित प्रक्रियाओं और लेखा प्रणाली के तहत संचालित होते हैं तथा नियमित ऑडिट भी कराया जाता है।
हालांकि, आरोपों और ट्रस्ट के स्पष्टीकरण के बीच एसआईटी सभी तथ्यों की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है।
अंतिम रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
फिलहाल एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के बाद सभी की निगाहें अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि अंतिम रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितना तथ्य है और क्या किसी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता हुई है अथवा नहीं।
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से संवेदनशील इस मामले की जांच को लेकर प्रदेश भर में व्यापक रुचि बनी हुई है। जांच पूरी होने के बाद सरकार और एसआईटी की ओर से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक किए जाने की संभावना है।