प्रकाश मेहरा
स्पेशल डेस्क
नई दिल्ली। केंद्र सरकार में अल्पसंख्यक मामलों तथा मत्स्य पालन राज्य मंत्री रहे George Kurian ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। राष्ट्रपति भवन द्वारा मंगलवार को जारी आधिकारिक बयान में बताया गया कि राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत उनका इस्तीफ़ा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है।
राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया, “भारत के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर केंद्रीय मंत्रिपरिषद से जॉर्ज कुरियन का इस्तीफ़ा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है।”
जॉर्ज कुरियन भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और दक्षिण भारत, विशेषकर केरल में पार्टी के प्रमुख ईसाई चेहरों में उनकी पहचान रही है। वे अल्पसंख्यक समुदायों के बीच भाजपा की पहुंच बढ़ाने की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते रहे हैं।
राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद लिया गया निर्णय
सूत्रों के अनुसार जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा सदस्य के रूप में छह वर्षीय कार्यकाल पूरा हो चुका था। संवैधानिक व्यवस्था के तहत मंत्री बने रहने के लिए संसद के किसी सदन की सदस्यता आवश्यक होती है। ऐसे में उनके इस्तीफ़े को इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।
हालांकि अभी तक न तो भाजपा नेतृत्व और न ही स्वयं जॉर्ज कुरियन की ओर से इस्तीफ़े के पीछे किसी राजनीतिक मतभेद या असहमति का संकेत दिया गया है। इसलिए इसे फिलहाल एक नियमित संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं जॉर्ज कुरियन ?
जॉर्ज कुरियन लंबे समय से भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं। वे पार्टी के राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न पदों पर कार्य कर चुके हैं और दक्षिण भारत में संगठन विस्तार के लिए सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। विशेष रूप से ईसाई समुदाय के बीच संवाद स्थापित करने और अल्पसंख्यक वर्गों तक भाजपा की नीतियों को पहुंचाने में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि “केरल जैसे राज्यों में भाजपा के विस्तार अभियान के दौरान कुरियन पार्टी के प्रमुख रणनीतिक चेहरों में शामिल रहे हैं।”
राजनीतिक विशेषज्ञ क्या कहते हैं ?
राजनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि “इस इस्तीफ़े को तत्काल किसी बड़े राजनीतिक संकट या विवाद से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार— जॉर्ज कुरियन का इस्तीफ़ा मुख्यतः राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने से जुड़ी संवैधानिक आवश्यकता का परिणाम प्रतीत होता है। भाजपा भविष्य में उन्हें किसी अन्य संवैधानिक या संगठनात्मक जिम्मेदारी में भी नियुक्त कर सकती है। दक्षिण भारत और अल्पसंख्यक समुदायों में उनकी उपयोगिता को देखते हुए पार्टी नेतृत्व उन्हें सक्रिय राजनीति से दूर नहीं रखेगा। आगामी संगठनात्मक फेरबदल या संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में उनकी भूमिका को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि “भाजपा दक्षिण भारत में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए अनुभवी नेताओं को नई जिम्मेदारियां देने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में कुरियन की राजनीतिक भूमिका आने वाले समय में नए स्वरूप में सामने आ सकती है।”
भविष्य में कौन-सी जिम्मेदारी !
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भाजपा नेतृत्व जॉर्ज कुरियन को भविष्य में कौन-सी जिम्मेदारी सौंपता है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि केंद्र सरकार उनके मंत्रालयों का अतिरिक्त प्रभार किस मंत्री को सौंपती है या मंत्रिपरिषद में कोई नया चेहरा शामिल किया जाता है। फिलहाल जॉर्ज कुरियन के इस्तीफ़े ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है, लेकिन उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इसे संवैधानिक प्रक्रिया और संसदीय सदस्यता से जुड़ा सामान्य प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।