प्रकाश मेहरा
स्पेशल डेस्क
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की बेटी के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई कथित अभद्र टिप्पणी को लेकर सख्त रुख अपनाने की बात कही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी बेटी के सम्मान से समझौता नहीं किया जा सकता और ऐसी घटनाओं पर तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए।
आजमगढ़ में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब उनके संज्ञान में यह मामला आया कि अखिलेश यादव की बेटी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की गई है, तो उन्होंने तुरंत पुलिस अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा, “बेटी, बेटी होती है। उसका सम्मान हर हाल में होना चाहिए। जैसे ही मुझे इस घटना की जानकारी मिली, मैंने पुलिस से कहा कि तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। किसी भी बेटी के खिलाफ अपमानजनक भाषा या टिप्पणी को स्वीकार नहीं किया जा सकता।”
उन्होंने भारतीय सामाजिक मूल्यों और संस्कारों का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति में बेटियों को विशेष सम्मान दिया जाता है। उन्होंने कहा, “हम उन संस्कारों में पले-बढ़े हैं जहां माना जाता है कि गांव की बेटी पूरे गांव की बेटी होती है और गांव की बहन पूरे गांव की बहन होती है। इसलिए बेटियों के सम्मान के मामले में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।”
अखिलेश यादव को भी दी नसीहत
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव को भी अप्रत्यक्ष रूप से नसीहत दी। उन्होंने कहा कि यदि वे दूसरों को मर्यादा और भाषा की सीख देते हैं तो उन्हें अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को भी संयमित भाषा का उपयोग करने की सलाह देनी चाहिए।
योगी आदित्यनाथ ने कहा, “अखिलेश जी, आप दूसरों को उपदेश देते हैं तो अपने चेले-चपाटों को भी थोड़ा उपदेश दीजिए। उन्हें बताइए कि सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा क्या होती है। दूसरों पर टिप्पणी करने से पहले उन्हें स्वयं भी आत्ममंथन करना चाहिए।”
सपा कार्यकर्ताओं की भाषा पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी से जुड़े कुछ लोग बहनों, बेटियों, बुजुर्गों, दिवंगत व्यक्तियों और वरिष्ठ नेताओं के प्रति भी अनुचित भाषा का प्रयोग करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन सार्वजनिक संवाद में शालीनता और मर्यादा बनी रहनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “आपके लोग किस प्रकार की भाषा का प्रयोग करते हैं, यह भी देखने की आवश्यकता है। लोकतंत्र में असहमति हो सकती है, लेकिन अभद्रता स्वीकार्य नहीं हो सकती।”
‘जरूरत पड़े तो हमें सौंप दीजिए’
अपने भाषण के अंत में मुख्यमंत्री ने हल्के व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि यदि अखिलेश यादव अपने कार्यकर्ताओं को अनुशासित नहीं कर पा रहे हैं, तो उन्हें उनके हवाले कर दें।
उन्होंने कहा, “अगर आप उन्हें समझा नहीं सकते हैं, तो उन्हें हमारे हवाले कर दीजिए। हम उन्हें अच्छी तरह समझा देंगे।”
बेटियों के सम्मान पर राजनीति से ऊपर उठने का संदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस बयान को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच बेटियों की गरिमा और सम्मान के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी राजनीतिक दल, विचारधारा या व्यक्ति से ऊपर बेटियों का सम्मान है और इस संबंध में कानून अपना काम करेगा।