प्रकाश मेहरा
चुनाव विशेष
असम विधानसभा चुनाव के रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक बार फिर मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। 126 सीटों वाले इस राज्य में पार्टी अपने दम पर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाती नजर आ रही है। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक बीजेपी करीब 80 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि कांग्रेस लगभग 25 सीटों पर आगे चल रही है।
इस चुनाव में सबसे बड़ा नुकसान ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) को होता दिख रहा है, जो महज 2 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिला है।
हिमंत बिस्वा सरमा का बढ़ता कद
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा को इस जीत का प्रमुख चेहरा माना जा रहा है। साल 2015 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्होंने तेजी से अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की। पिछले एक दशक में वे न सिर्फ बीजेपी के सबसे प्रभावशाली नेता बनकर उभरे, बल्कि राज्य की राजनीति में कई दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया।
उनके नेतृत्व में बीजेपी ने एंटी-इनकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) को भी प्रभावी तरीके से काबू में रखा और लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की ओर बढ़ती दिख रही है।
योजनाओं का मिला फायदा
राज्य सरकार की कई योजनाओं ने इस चुनाव में अहम भूमिका निभाई। खासतौर पर ओरुनोदोई योजना: गरीब महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता। लखपति बैदेउ योजना: महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना। बीजेपी का दावा है कि “इन योजनाओं से लाखों महिलाओं को सीधा लाभ मिला, जिससे जमीनी स्तर पर पार्टी को समर्थन बढ़ा।”
केंद्र की योजनाओं का असर
राज्य में सड़कों, पुलों और बुनियादी ढांचे के विकास में केंद्र सरकार की योजनाओं का भी योगदान रहा। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बीजेपी की पकड़ मजबूत हुई।
पिछले चुनावों से तुलना !
2021 चुनाव: बीजेपी 60 सीटें, कांग्रेस 29, AIUDF 16
2016 चुनाव: बीजेपी 60 सीटें, कांग्रेस 26
इन आंकड़ों के मुकाबले इस बार बीजेपी का प्रदर्शन और बेहतर होता दिख रहा है, जो उसकी बढ़ती राजनीतिक ताकत को दर्शाता है। असम में बीजेपी की संभावित जीत केवल सरकारी योजनाओं का परिणाम नहीं है, बल्कि इसमें हिमंता बिस्वा शर्मा की रणनीति, संगठन क्षमता और नेतृत्व की बड़ी भूमिका मानी जा रही है। वहीं विपक्ष, खासकर AIUDF के कमजोर प्रदर्शन ने भी बीजेपी के लिए रास्ता आसान किया है।