प्रकाश मेहरा
चुनाव विशेष
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। चुनावी रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) मज़बूत बढ़त बनाती दिखाई दे रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को कड़ी टक्कर मिल रही है। राज्य में लंबे समय से सत्ता में रही टीएमसी के खिलाफ इस बार एंटी-इंकम्बेंसी का असर साफ़ नजर आ रहा है। कई इलाकों से ऐसी शिकायतें सामने आईं कि स्थानीय स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं का दबदबा बढ़ गया था और बिना उनकी सहमति के काम कराना मुश्किल हो गया था। इस नाराज़गी ने मतदाताओं को बदलाव की ओर मोड़ा।
2021 से तैयार हुई ज़मीन
बीजेपी की मौजूदा बढ़त अचानक नहीं आई है। 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 3 सीटों से छलांग लगाकर 77 सीटें जीती थीं और खुद को मुख्य विपक्ष के रूप में स्थापित किया था। इसके बाद से बीजेपी ने लगातार अपनी पकड़ मज़बूत की।
ध्रुवीकरण और वोटों का झुकाव
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस चुनाव में वोटों का ध्रुवीकरण भी देखने को मिला। एक वर्ग में सुरक्षा और पहचान को लेकर चिंता ने बीजेपी के पक्ष में लामबंदी की। वहीं, कुछ क्षेत्रों में अल्पसंख्यक वोटों के बंटवारे की भी चर्चा है, जिससे टीएमसी को नुकसान हुआ।
एसआईआर (SIR) का असर
मतदाता सूची के विशेष संशोधन (Special Intensive Revision) का प्रभाव भी चुनाव पर पड़ा। रिपोर्ट्स के मुताबिक बड़ी संख्या में मतदाता वोटिंग से बाहर रह गए, जिससे कई सीटों पर नतीजों का संतुलन बदल गया।
इस चुनाव में मुकाबला मुख्य रूप से टीएमसी और बीजेपी के बीच ही सिमट गया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) (सीपीएम) प्रभावी चुनौती नहीं दे सके। इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिला, क्योंकि टीएमसी विरोधी वोट एकजुट होकर बीजेपी के पक्ष में चले गए।
क्या है बढ़ता वोट शेयर के मायने !
बीजेपी का वोट शेयर पिछले कुछ सालों में लगातार बढ़ा है—
2016: करीब 10%
2019 लोकसभा: 40% से अधिक
2021 विधानसभा: 38.1%
मौजूदा रुझान: 45% के पार
मतदाताओं ने “बदलाव” की मांग !
ग्राउंड रिपोर्ट्स में कई मतदाताओं ने “बदलाव” की मांग को प्रमुख मुद्दा बताया। स्थानीय स्तर की नाराज़गी, राजनीतिक ध्रुवीकरण और विपक्ष की कमज़ोरी—इन सभी कारकों ने मिलकर इस चुनाव में बीजेपी को बढ़त दिलाई। पश्चिम बंगाल में बीजेपी की बढ़त किसी एक कारण का नतीजा नहीं है, बल्कि यह कई सामाजिक, राजनीतिक और चुनावी कारकों के संयुक्त प्रभाव का परिणाम है। आने वाले नतीजे यह तय करेंगे कि यह बढ़त सत्ता परिवर्तन में बदलती है या नहीं।