दिल्ली डेस्क
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ के एजेंट व गैंग्सटर शहजाद भट्टी माड्यूल के जिन छह आतंकियों को दिल्ली और अमृतसर से गिरफ्तार किया है, उनमें खतौली, मुजफ्फरनगर के रहने वाले दानिश व सलमान को पाकिस्तानी हैंडलर ने दिल्ली के किसी संवेदनशील इलाके या थाने पर पेट्रोल बम से हमला करने और उसका वीडियो बनाकर पाकिस्तान भेजने का टास्क दिया था।
कालिंदी कुंज से पकड़े गए तीन अन्य आतंकियाें को इन्हें सहयोग करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हैरान करने वाली बात यह है कि देश की राजधानी को दहलाने की इस खौफनाक साजिश के लिए दानिश व सलमान को महज 20-20 हजार रुपये का लालच दिया गया था। इतने छोटे लालच के लिए दोनों, आतंकी वारदात करने के लिए तैयार हो गए थे।
मुजफ्फरनगर के मुस्लिम बाहुल्य इलाके खतौली के रहने वाले दानिश और सलमान चोरी की एक बाइक पर बैग में तीन पेट्रोल बम छिपाकर रविवार शाम दिल्ली पहुंचे थे। सोमवार तड़के दानिश को दिल्ली के किसी महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान या थाने पर पेट्रोल बम फेंकना था, जबकि उसका दोस्त सलमान इस पूरी वारदात का वीडियो बनाने वाला था।
यह वीडियो पाकिस्तानी हैंडलर को भेजा जाना था ताकि उसे इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित कर दहशत पैदा की जा सके। लेकिन इससे पहले कि वे अपने मंसूबों को अंजाम दे पाते, स्पेशल सेल ने रविवार देर रात ही पहले दोनों को दबोच लिया। उनसे पूछताछ के बाद तीन अन्य को विजय घाट से दबोच लिया गया।
पूछताछ में सामने आया है कि दानिश और सलमान कुछ महीने पहले ही इंस्टाग्राम के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर राणा हुनैन के संपर्क में आए थे। राणा हुनैन, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ के एजेंट और कुख्यात गैंग्सटर शहजाद भट्टी का करीबी सहयोगी है।
डीसीपी प्रवीण कुमार त्रिपाठी का कहना है कि जांच में इस पूरे नेटवर्क का कच्चा चिट्ठा सामने आया है, जो पाकिस्तान से लेकर पंजाब, यूपी और दिल्ली तक फैला हुआ था। दानिश इसी साल अप्रैल में इंस्टाग्राम के जरिए राणा हुनैन से जुड़ा था। इसे दिल्ली में रेकी करने और पेट्रोल बम से हमला करने की मुख्य जिम्मेदारी दी गई थी। काम पूरा होने पर इसे 20 हजार रुपये मिलने थे। हैंडलर इसे फोन पर लगातार निर्देश दे रहा था।
सलमान, दानिश का दोस्त है। इसे हमले के वक्त मोबाइल से वीडियो रिकार्ड करने का टास्क सौंपा गया था। इसे भी वारदात के बदले 20 हजार रुपये का लालच दिया गया था। इस माड्यूल के तार पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए आने वाले हथियारों की तस्करी से भी जुड़े हैं। तैयब भी इंस्टाग्राम के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर हसन गुज्जर के संपर्क में आया था।
हसन के कहने पर तैयब ने भारत में हथियारों की डिलीवरी और बिक्री का नेटवर्क तैयार किया। जुबैर खान, तैयब का साथी है। वह अमृतसर जाकर पाकिस्तानी हैंडलर के गुर्गे मलकीत सिंह के घर रुका था और वहां से पिस्टल व कारतूसों की खेप रिसीव की थी।
मलकीत सिंह, पंजाब का रहने वाला है और पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए गिराए गए हथियारों को कलेक्ट करता था और आगे जुबैर जैसे करियर (सप्लायर) को सौंप देता था। अली फज़ल, तैयब का जीजा है। इसे पाकिस्तान से आए हथियारों को दिल्ली और यूपी के खरीदारों को बेचने का जिम्मा मिला था।
अली फज़ल का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है, पिछले साल यूपी पुलिस ने उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट का मामला दर्ज किया था। सेल का कहना है कि पाकिस्तानी हैंडलर्स इंटरनेट मीडिया (विशेषकर इंस्टाग्राम) के जरिये कम उम्र के युवकों को बरगला रहे हैं और बेहद मामूली रकम का लालच देकर उन्हें आतंकी गतिविधियों में धकेल रहे हैं। समय रहते की गई कार्रवाई से राजधानी में होने वाली आतंकी वारदात को टाल दिया गया।