प्रकाश मेहरा
स्पेशल डेस्क
नई दिल्ली। मणिपुर में एक बार फिर हिंसा की घटनाओं के सामने आने के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मणिपुर लंबे समय से हिंसा और अस्थिरता की चपेट में है तथा हाल की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि राज्य में शांति बहाल करने के प्रयास अभी तक अपेक्षित परिणाम नहीं दे सके हैं।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि “मणिपुर वर्षों से हिंसा की आग में झुलस रहा है और ताज़ा घटनाओं में लगभग 20 घर जलकर राख हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में दो सरकारों के कार्यकाल और वर्तमान में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बावजूद हालात में सुधार नहीं हुआ है, बल्कि सामाजिक तनाव और संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों की हिंसा में हजारों लोगों की जान जा चुकी है और बड़ी संख्या में परिवार विस्थापित हुए हैं। उनके अनुसार, मणिपुर जिस मानवीय संकट और पीड़ा का सामना कर रहा है, उसकी कल्पना करना भी कठिन है। राहुल गांधी ने दावा किया कि यह स्थिति केंद्र सरकार की “विभाजनकारी राजनीति” का परिणाम है, जो समाज को धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र और पहचान के आधार पर बांटने का काम करती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना
कांग्रेस सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि “आज केवल मणिपुर ही नहीं, बल्कि पूरा देश उनसे संवेदना के कुछ शब्दों की भी अपेक्षा छोड़ चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में शांति स्थापित करने और लोगों का विश्वास बहाल करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
राहुल गांधी ने अपने संदेश के अंत में कहा कि “मणिपुर के लोग शांति, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन के हकदार हैं। उनका कहना था कि सामाजिक सद्भाव, संवाद और सभी समुदायों के बीच विश्वास बहाली ही राज्य को स्थायी शांति की ओर ले जा सकती है। इसी संदर्भ में उन्होंने कांग्रेस के “भारत जोड़ो” अभियान का उल्लेख करते हुए इसे देश में एकता और सामाजिक सौहार्द स्थापित करने का रास्ता बताया।
मणिपुर में समय-समय पर हिंसा की घटनाएं
मणिपुर में समय-समय पर हिंसा की घटनाएं राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का विषय रही हैं। कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार की कानून-व्यवस्था और संकट प्रबंधन को लेकर सवाल उठाती रही है, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि राज्य में शांति बहाल करने और सामान्य स्थिति स्थापित करने के लिए लगातार सुरक्षा एवं प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
हाल की घटनाओं के बाद एक बार फिर मणिपुर का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है और विपक्ष सरकार से अधिक प्रभावी हस्तक्षेप की मांग कर रहा है।