सरल डेस्क
वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम के पहले भारत दौरे की शुरुआत बिहार की धरती से हुई, जहां गया एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच जैसे ही उनका काफिला बोधगया की ओर बढ़ा, माहौल पूरी तरह उत्सव में बदल गया।
बोधगया पहुंचते ही पारंपरिक वेशभूषा में सजे बच्चों ने रंग-बिरंगे सांस्कृतिक नृत्य से राष्ट्रपति का स्वागत किया।हाथ जोड़कर खड़े छोटे-छोटे बच्चों की मुस्कान और उनकी ताल पर थिरकती झांकी ने ऐसा दृश्य रचा, मानो भारत-वियतनाम की दोस्ती जीवंत हो उठी हो।
बौद्ध परंपरा की झलक हर कोने में दिख रही
पूरे परिसर को रंगीन झंडियों और सजावट से सजाया गया था। बौद्ध परंपरा की झलक हर कोने में दिख रही थी।राष्ट्रपति भी इस स्वागत से अभिभूत नजर आए और मुस्कुराते हुए बच्चों और आयोजकों का अभिवादन करते रहे।इसके बाद राष्ट्रपति तो लाम महाबोधि मंदिर पहुंचे, जहां पारंपरिक तरीके से उनका स्वागत किया गया।मंदिर के गर्भगृह में उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना की और पवित्र बोधि वृक्ष के नीचे कुछ समय ध्यान लगाया।
इस दौरान शांति और आध्यात्मिकता का अनोखा संगम देखने को मिला। मंदिर परिसर में भिक्षुओं के साथ राष्ट्रपति ने हाथ जोड़कर प्रार्थना की। इस दौरान उन्होंने विश्व शांति और सद्भाव का संदेश दिया।
यह दृश्य भारत और वियतनाम के साझा बौद्ध संबंधों की गहराई को साफ तौर पर दर्शाता नजर आया।राष्ट्रपति तो लाम 6 मई को दिल्ली में औपचारिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। राष्ट्रपति भवन में स्वागत, राजघाट पर श्रद्धांजलि और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक के बाद कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।