सरल डेस्क
इजरायल ने मिसाइल डिफेंस के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इजरायल की अगली पीढ़ी की इंटरसेप्टर मिसाइल ‘एरो-4’ (Arrow-4) अब विकास के एडवांस स्टेज में पहुंच चुकी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आने वाले कुछ महीनों में इसकी फ्लाइट टेस्टिंग (उड़ान परीक्षण) शुरू हो सकती है। यह नई मिसाइल खास तौर पर उन आधुनिक खतरों को रोकने के लिए तैयार की जा रही है, जिनसे मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम को सबसे ज्यादा चुनौती मिलती है।
अमेरिका के साथ मिलकर बन रहा है ‘एरो-4’
‘एरो-4’ सिस्टम को इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) और अमेरिका की मिसाइल डिफेंस एजेंसी (MDA) मिलकर विकसित कर रही हैं। यह साझेदारी इजरायल और अमेरिका के बीच रणनीतिक रक्षा सहयोग का एक बड़ा उदाहरण मानी जा रही है।
किन मिसाइलों को रोकने में सक्षम होगी एरो-4?
यह सिस्टम खास तौर पर दो तरह के खतरों को खत्म करने के लिए बनाया गया है हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल्स (HGVs) हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल्स बेहद तेज गति से उड़ते हैं और रास्ते में दिशा बदल सकते हैं। इन्हें रोकना पारंपरिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए काफी मुश्किल होता है।
घुमावदार बैलिस्टिक मिसाइलें
कुछ बैलिस्टिक मिसाइलें सामान्य सीधी लाइन में नहीं आतीं, बल्कि उनका रास्ता घुमावदार होता है। ऐसी मिसाइलों को ट्रैक करना और सही समय पर इंटरसेप्ट करना बहुत चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
ईरान की हाइपरसोनिक मिसाइलों के संदर्भ में क्यों अहम है यह सिस्टम ? पिछले कुछ समय में ईरान ने दावा किया है कि उसके पास हाइपरसोनिक मिसाइलें मौजूद हैं। इसी वजह से इजरायल लगातार अपने मिसाइल डिफेंस को अपग्रेड कर रहा है। एरो-4 को ऐसे ही हाई-एंड मिसाइल खतरों के खिलाफ एक मजबूत “काट” के रूप में देखा जा रहा है।
एरो-4 से इजरायल की सुरक्षा क्षमता कैसे बढ़ेगी?।
विशेषज्ञों के अनुसार, ‘एरो-4’ के आने से “इजरायल का लॉन्ग-रेंज एयर डिफेंस और मजबूत होगा। हाइपरसोनिक जैसे तेज और दिशा बदलने वाले हथियारों को रोकने की क्षमता बढ़ेगी। इजरायल की रणनीतिक सुरक्षा को बड़ा फायदा मिलेगा।
आने वाले महीनों में शुरू हो सकती है टेस्टिंग
सूत्रों के मुताबिक, ‘एरो-4’ अब उस स्तर पर पहुंच चुकी है, जहां जल्द ही फ्लाइट टेस्ट किए जा सकते हैं। यदि टेस्टिंग सफल रही तो यह सिस्टम भविष्य में इजरायल की रक्षा प्रणाली का अहम हिस्सा बन सकता है।
इजरायल की ‘एरो-4’ मिसाइल को एक अत्याधुनिक इंटरसेप्टर के रूप में देखा जा रहा है, जो हाइपरसोनिक और एडवांस बैलिस्टिक मिसाइलों जैसे बड़े खतरों को रोकने में सक्षम हो सकती है। अमेरिका के सहयोग से बन रही यह तकनीक आने वाले समय में पश्चिम एशिया की सुरक्षा रणनीति पर बड़ा असर डाल सकती है।