अनिल गुप्ता
दिल्ली डेस्क
नई दिल्ली। 2017 के उन्नाव बलात्कार मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सज़ा को दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा सस्पेंड किए जाने के आदेश के खिलाफ बुधवार को जंतर-मंतर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया गया। इस दौरान पीड़िता के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे लोगों (योगिता भयाना) और कुलदीप सिंह सेंगर का समर्थन करने वाले एक समूह के बीच तीखी नोकझोंक के बाद झड़प की स्थिति बन गई।
प्रदर्शन में सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना के साथ-साथ पीड़िता की मां और कई अन्य समर्थक शामिल थे। पीड़िता की मां ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हमें न्याय चाहिए। कुलदीप सिंह सेंगर को फांसी की सज़ा मिलनी चाहिए। हमारी बेटी के साथ जो हुआ, उसके लिए कोई रियायत नहीं होनी चाहिए।”
सज़ा निलंबन का फैसला वापस लिया जाए
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सज़ा सस्पेंड करने का आदेश पीड़िता और उसके परिवार के साथ अन्याय है और इससे न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने मांग की कि सज़ा निलंबन का फैसला वापस लिया जाए और दोषी को कठोरतम सज़ा दी जाए।
इसी दौरान खुद को ‘पुरुष आयोग’ से जुड़े सदस्य बताने वाले कुछ लोग भी मौके पर पहुंचे, जो कुलदीप सिंह सेंगर के समर्थन में नारेबाज़ी कर रहे थे। दोनों पक्षों के आमने-सामने आने के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया और आपसी बहस धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। पुलिस ने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया और किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।
महिलाओं की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था
प्रदर्शन में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) छात्र संघ से जुड़े कई छात्र भी पीड़िता के समर्थन में शामिल नजर आए। छात्रों ने कहा कि यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा है। विरोध प्रदर्शन के दौरान एक-दूसरे पर कई आरोप-प्रत्यारोप भी लगाए गए। हालांकि पुलिस और प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया।
उल्लेखनीय है कि उन्नाव रेप केस देश के चर्चित मामलों में से एक रहा है, जिसमें पीड़िता और उसके परिवार को पहले भी कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। सज़ा निलंबन के फैसले के बाद एक बार फिर यह मामला सार्वजनिक बहस के केंद्र में आ गया है।