सरल डेस्क
नई दिल्ली। देश में बढ़ते एसिड अटैक मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने इस गंभीर अपराध से जुड़े मामलों पर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। कोर्ट का कहना है कि एसिड अटैक न केवल पीड़ित के शरीर को बल्कि उसके पूरे जीवन को प्रभावित करता है, ऐसे में इस अपराध पर प्रभावी रोक और पीड़ितों के पुनर्वास के लिए ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से जिन बिंदुओं पर जानकारी मांगी है, उनमें एसिड अटैक के कुल मामलों की संख्या, अब तक दर्ज हुए मामलों की वर्तमान स्थिति, ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट में लंबित मामलों का विवरण, अपील की स्थिति और दोषियों को दी गई सजा की जानकारी शामिल है। इसके अलावा कोर्ट ने पीड़ितों का पूरा ब्यौरा, उन्हें उपलब्ध कराए गए इलाज, इलाज पर होने वाले खर्च और सरकार द्वारा दी जा रही मुआवजा एवं पुनर्वास योजनाओं की जानकारी भी मांगी है।
मुफ्त इलाज मिलना उनका संवैधानिक अधिकार
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि एसिड अटैक पीड़ितों को समय पर और मुफ्त इलाज मिलना उनका संवैधानिक अधिकार है। कोर्ट यह जानना चाहती है कि राज्य सरकारें पीड़ितों के इलाज और पुनर्वास को लेकर बनाए गए दिशानिर्देशों का कितनी गंभीरता से पालन कर रही हैं।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से भी इस मुद्दे पर विचार करने को कहा है कि क्या मौजूदा कानूनों में बदलाव कर एसिड अटैक के दोषियों के लिए और अधिक कठोर सजा का प्रावधान किया जाना चाहिए। अदालत का मानना है कि सख्त सजा और प्रभावी कानून ही इस तरह के जघन्य अपराधों पर लगाम लगाने में मदद कर सकते हैं।
कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे तय समयसीमा के भीतर पूरी और सही जानकारी प्रस्तुत करें, ताकि मामले की अगली सुनवाई में इस पर ठोस निर्णय लिया जा सके।