प्रकाश मेहरा
स्पेशल डेस्क
मेरठ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली-मेरठ नमो भारत रैपिड रेल कॉरिडोर के पूरे 82 किलोमीटर स्ट्रेच और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का प्रतीक था, बल्कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा की रणनीति का एक मजबूत संकेत भी। मोदी और योगी की साझेदारी (जुगलबंदी) ने विकास के नैरेटिव को राजनीतिक विश्वास में बदलने का काम किया, जो 2017 की तरह प्रचंड जीत का गेम प्लान तय करता नजर आया। कार्यक्रम में लगभग 12,930 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लोकार्पण हुआ, जिसमें रैपिड रेल और मेट्रो के अलावा अन्य विकास कार्य शामिल थे।
नमो भारत रैपिड रेल मुख्य आकर्षण
दिल्ली के सराय काले खां से मेरठ के मोदीपुरम तक 82 किमी का पूरा स्ट्रेच उद्घाटन हुआ। अब दिल्ली से मेरठ का सफर मात्र 55 मिनट में संभव होगा। यह परियोजना 30,270 करोड़ रुपये की लागत से बनी, जिसकी आधारशिला मोदी ने 2019 में रखी थी।
मेरठ मेट्रो 23 किमी लंबी लाइन पर 13 स्टेशन, जिसमें एक ही टिकट से नमो भारत और मेट्रो का सफर संभव। पीएम मोदी और सीएम योगी ने शताब्दी नगर स्टेशन से हरी झंडी दिखाई और बच्चों के साथ मेट्रो में सफर किया। सेमीकंडक्टर यूनिट की आधारशिला, डिजिटल इंडिया पर जोर, और पश्चिमी यूपी में निवेश को बढ़ावा। योगी ने कहा कि पहले मेरठ-दिल्ली की दूरी चुनौती थी, अब 45-50 मिनट में पूरी हो जाएगी।
योगी सरकार की कार्यशैली की सराहना
पीएम मोदी ने योगी सरकार की कार्यशैली की सराहना की, कहा कि भाजपा के लिए देश और यूपी का विकास सर्वोपरि है। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि सपा-कांग्रेस जैसी पार्टियां “जहरीली राजनीति” कर रही हैं, जबकि भाजपा विकास पर फोकस कर रही है। मोदी ने हाल ही दिल्ली में एआई समिट पर कांग्रेस की “शर्टलेस प्रोटेस्ट” को “गंदी और नंगी राजनीति” बताया, और कहा कि कांग्रेस पहले से ही “नंगी” है, फिर कपड़े उतारने की क्या जरूरत। उन्होंने मीडिया से अपील की कि कांग्रेस के पापों को छिपाने की बजाय सीधे नाम लेकर रिपोर्ट करें।
सीएम योगी ने मोदी की दूरदर्शिता की प्रशंसा की, कहा कि यह परियोजना विकसित भारत की नींव मजबूत करेगी। उन्होंने पश्चिमी यूपी में कानून-व्यवस्था में सुधार का जिक्र किया, जो निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। दोनों नेताओं की जुगलबंदी ने डबल इंजन सरकार के मॉडल को मजबूत किया, जो 2027 के लिए संकेत देता है।
2027 के लिए गेम प्लान
मेरठ का कार्यक्रम 2027 विधानसभा चुनावों का प्रारंभिक संकेत था। भाजपा का मुख्य फोकस विकास नैरेटिव इंफ्रास्ट्रक्चर को चुनावी हथियार बनाना, जैसे रैपिड रेल और मेट्रो से पश्चिमी यूपी को जोड़ना। कांग्रेस को मुख्य निशाने पर रखकर सपा को कमजोर करना। इससे विपक्षी एकता में दरार पड़ सकती है, क्योंकि अगर कांग्रेस मजबूत होती है, तो अखिलेश यादव की सपा को सामाजिक समीकरणों पर पुनर्विचार करना पड़ेगा। मोदी-योगी की जोड़ी को स्थिर नेतृत्व के रूप में पेश करना, जबकि विपक्ष को “अनिश्चितता” का प्रतीक बताना। 2017 जैसी जीत के लिए डबल इंजन मॉडल को अभेद्य बनाना। बिहार मॉडल की नकल कांग्रेस को उभारकर क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी (सपा) पर दबाव डालना।
यह रणनीति विकास को उपलब्धि से चुनावी विश्वास में बदलने पर आधारित है, जो भाजपा को दोहरी बढ़त देती है राज्य स्तर पर विश्वसनीयता बढ़ाना और विपक्ष में असमंजस पैदा करना।
मोदी के भाषण की आलोचना की
कांग्रेस ने मोदी के भाषण की आलोचना की, कहा कि यह विपक्ष पर हमलों पर केंद्रित था, जबकि जनता के मुद्दों जैसे बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की आय, शिक्षा और सामाजिक न्याय पर कोई ठोस नीति नहीं बताई गई। कांग्रेस प्रवक्ता अभिमन्यु त्यागी ने कहा कि पूछताछ करना विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार है। एआई समिट पर प्रोटेस्ट को “देश की छवि खराब करने” का आरोप लगाने पर कांग्रेस ने जवाब दिया कि यह सरकार की नीतियों के खिलाफ वैध विरोध था।
समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने अभी तक सीधा जवाब नहीं दिया, लेकिन सपा को इस हमले से चुनौती मिल सकती है, क्योंकि भाजपा कांग्रेस को मुख्य विपक्ष बनाकर सपा के आधार को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। कुछ सोशल मीडिया कमेंट्स में विपक्ष ने मोदी की आलोचना की, लेकिन कोई बड़ा रिस्पॉन्स नहीं आया।
यह कार्यक्रम भाजपा की 2027 रणनीति का ब्लूप्रिंट है, जहां विकास को राजनीतिक हथियार बनाया गया। मोदी-योगी की जुगलबंदी ने पश्चिमी यूपी में आधार मजबूत किया, जो चुनावी रूप से महत्वपूर्ण है। हालांकि, विपक्ष अगर जन मुद्दों पर फोकस करे, तो चुनौती दे सकता है। कुल मिलाकर, यह 2017 की प्रचंड जीत की दिशा में एक कदम है, लेकिन विपक्षी एकता और आर्थिक मुद्दे निर्णायक होंगे।