पत्नी और ससुर की गिरफ्तारी के बाद सामने आया आयुष का पक्ष, बोले– “मैंने अपनी मर्ज़ी से इस्लाम अपनाया”
प्रकाश मेहरा | स्पेशल डेस्क
उत्तर प्रदेश के शामली में एक धर्म परिवर्तन और निकाह से जुड़ा मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। दवा कारोबारी परिवार से जुड़े आयुष मलिक, जो अब स्वयं को मोहम्मद अली बताते हैं, का दावा है कि उन्होंने अपनी इच्छा से इस्लाम स्वीकार किया और अपनी पसंद से निकाह किया। दूसरी ओर परिवार और पुलिस इसे कथित साजिश और धर्म परिवर्तन से जोड़कर जांच कर रहे हैं।
कौन हैं आयुष मलिक ?
आयुष मलिक शामली के एक संपन्न कारोबारी परिवार से आते हैं। उनके पिता देवराज मलिक स्थानीय दवा व्यवसाय से जुड़े बताए जाते हैं। परिवार के अनुसार आयुष चार भाई-बहनों में अकेले बेटे हैं। आयुष का कहना है कि “उनका इस्लाम की ओर झुकाव नया नहीं था।”
उन्होंने मीडिया से कहा— “दस्तावेज़ों में मेरा नाम आयुष मलिक है, लेकिन अब मैं मोहम्मद अली के नाम से जाना जाता हूं। मैं स्कूल के समय से इस्लाम के बारे में सीख रहा था और धीरे-धीरे इस्लामी जीवनशैली अपनाने लगा।”
चांदनी कुरैशी से कैसे हुई मुलाकात?
आयुष के अनुसार उनकी मुलाकात चांदनी कुरैशी से फिजियोथैरेपी सेंटर के दौरान हुई। उन्होंने बताया कि शुरुआत में चांदनी निकाह के लिए तैयार नहीं थीं, लेकिन बाद में दोनों ने सहमति से शादी की। आयुष ने कहा— “हम साथ रहना चाहते थे, परिवार बनाना चाहते थे, लेकिन हालात ऐसे बने कि आज वह जेल में हैं।”
परिवार का आरोप क्या है?
आयुष के पिता देवराज मलिक का आरोप है कि उनके बेटे को कथित रूप से प्रभावित कर धर्म परिवर्तन कराया गया। परिवार का कहना है कि “उन्हें फरवरी में इस बदलाव की जानकारी मिली और उन्होंने आयुष को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माने। परिवार ने पूरे घटनाक्रम को सुनियोजित बताया है।”
पुलिस ने क्या कार्रवाई की ?
शामली पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया और चांदनी कुरैशी तथा उनके पिता इस्लाम कुरैशी को गिरफ्तार किया। मामले में कुल 9 नामजद और एक अज्ञात व्यक्ति को आरोपी बनाया गया है। इनमें परिवार से जुड़े लोग और एक मौलवी का नाम भी शामिल बताया गया है। पुलिस का दावा है कि “धर्म परिवर्तन और निकाह कथित तौर पर योजनाबद्ध तरीके से कराया गया।”
किन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा ?
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। इनमें शामिल आरोप— धोखाधड़ी। जालसाजी। जाली दस्तावेज़ का उपयोग। आपराधिक साजिश। धमकी। कथित दबाव और आर्थिक लाभ का प्रयास।
आयुष ने क्या कहा ?
आयुष का कहना है कि उन्होंने अपनी इच्छा से धर्म स्वीकार किया है। उन्होंने कहा— “मेरा परिवार नाराज़ है लेकिन मैं किसी दबाव में नहीं हूं। मैं अपनी नई धार्मिक पहचान के साथ रह सकता हूं।”
कानून क्या कहता है ?
भारतीय संविधान नागरिकों को अपनी पसंद का धर्म मानने और उसका पालन करने की स्वतंत्रता देता है। हालांकि यदि धर्म परिवर्तन में बल, धोखा, प्रलोभन या अनुचित प्रभाव के आरोप हों, तो कानून जांच और कार्रवाई की अनुमति देता है। यह मामला अभी जांच के अधीन है। आने वाले समय में जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर यह तय होगा कि धर्म परिवर्तन स्वेच्छा से हुआ या किसी कथित साजिश का हिस्सा था।