सरल डेस्क
मुंबई से सटे मुंब्रा इलाके से हाल ही में AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन) की उम्मीदवार सहर शेख पार्षद चुनी गईं। उनकी जीत के बाद दिया गया एक भाषण इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस भाषण में उन्होंने “पूरे मुंब्रा को हरे रंग में रंगने” की बात कही, जिसके बाद इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है।
सहर शेख के इस बयान को लेकर जहां विरोधी दलों ने इसे सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाया, वहीं AIMIM नेताओं ने इसका बचाव किया है। इसी कड़ी में AIMIM के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद वारिस पठान भी सहर शेख के समर्थन में सामने आए हैं।
वारिस पठान का बयान
वारिस पठान ने कहा, “हम सिर्फ महाराष्ट्र नहीं, बल्कि पूरे देश को हरे रंग में देंगे।” उनके इस बयान के सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया है। विपक्षी दलों का कहना है कि इस तरह की भाषा समाज में ध्रुवीकरण को बढ़ावा देती है, जबकि AIMIM नेताओं का दावा है कि ‘हरा रंग’ विकास, शांति और तरक्की का प्रतीक है, न कि किसी धर्म विशेष का।
राष्ट्रीय स्तर तक सियासी बयानबाजी तेज
सहर शेख के बयान और उस पर वारिस पठान के समर्थन के बाद राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कई भाजपा और अन्य विपक्षी नेताओं ने AIMIM पर आरोप लगाया है कि पार्टी जानबूझकर भावनात्मक और सांप्रदायिक मुद्दों को हवा दे रही है।
वहीं AIMIM समर्थकों का कहना है कि उनके बयानों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है और पार्टी का उद्देश्य सिर्फ अपने संगठन को मजबूत करना और जनता के मुद्दों को उठाना है।
सोशल मीडिया पर बहस
इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी दो गुट बन गए हैं। एक तरफ लोग बयान की आलोचना कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ AIMIM समर्थक इसे राजनीतिक बयान बताकर समर्थन कर रहे हैं।
मुंब्रा की पार्षद सहर शेख के एक बयान से शुरू हुआ यह मामला अब बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। वारिस पठान के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है। फिलहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि AIMIM इस विवाद को किस तरह संभालती है और इसका असर स्थानीय व राज्य की राजनीति पर कितना पड़ता है।