स्पेशल डेस्क
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने 1 जुलाई 2026 से देशभर में ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव लागू करते हुए ‘विकसित भारत-जी राम जी’ (VBG Ram Ji – विकसित भारत गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन-ग्रामीण) कानून को प्रभावी कर दिया है। इस कानून के लागू होने के साथ ही लंबे समय से संचालित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह नई व्यवस्था लागू हो गई है।
सरकार का कहना है कि “नई व्यवस्था का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना, मजदूरी दरों में सुधार करना तथा आजीविका के अधिक स्थायी साधन उपलब्ध कराना है। इसके तहत देश के किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में अधिसूचित दैनिक मजदूरी 300 रुपये से कम नहीं होगी।”
राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी मजदूरी
सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार सभी 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मजदूरी दरों में संशोधन किया गया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद देश में औसत दैनिक मजदूरी 298.80 रुपये से बढ़कर 327.40 रुपये हो गई है। इस प्रकार राष्ट्रीय स्तर पर मजदूरी में औसतन 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
कई राज्यों में 15 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी
सरकार के अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में मजदूरी दरों में 15 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है।
कुछ राज्यों में निर्धारित नई दैनिक मजदूरी इस प्रकार है—
हरियाणा – 409 रुपये प्रतिदिन
गोवा – 406 रुपये प्रतिदिन
केरल – 401 रुपये प्रतिदिन
सिक्किम के ऊंचाई वाले ग्राम पंचायत क्षेत्र – 450 रुपये प्रतिदिन
कर्नाटक और पंजाब सहित कुछ अन्य राज्यों में मजदूरी 360 रुपये से अधिक निर्धारित की गई है।
पिछले वर्ष संसद से पारित हुआ था कानून
सरकार के अनुसार ‘विकसित भारत-जी राम जी’ विधेयक, 2025 को संसद ने पिछले वर्ष दिसंबर में पारित किया था। इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी मिलने के उपरांत इसे 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू कर दिया गया।
मनरेगा की जगह नई व्यवस्था
वर्ष 2005 में तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए)> सरकार द्वारा लागू किए गए मनरेगा कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को प्रत्येक वर्ष 100 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी प्रदान की जाती थी।
नई योजना ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ इसी व्यवस्था का स्थान ले रही है। सरकार का दावा है कि नई योजना रोजगार के साथ-साथ ग्रामीण आजीविका को अधिक मजबूत बनाने पर भी केंद्रित होगी।
विपक्ष ने उठाए सवाल
नई व्यवस्था को लेकर विपक्ष ने कई आपत्तियां भी दर्ज कराई हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि नए कानून में केंद्र सरकार को पहले की तुलना में अधिक अधिकार दिए गए हैं, जबकि राज्य सरकारों पर वित्तीय भार बढ़ सकता है। उनका कहना है कि राज्यों को पहले की अपेक्षा अधिक खर्च वहन करना पड़ेगा और निर्णय प्रक्रिया में उनकी भूमिका सीमित हो सकती है।
देशभर में मजदूरों को बेहतर मजदूरी
केंद्र सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से देशभर में मजदूरों को बेहतर मजदूरी मिलेगी, ग्रामीण रोजगार को नई दिशा मिलेगी तथा आजीविका के स्थायी अवसर विकसित होंगे। सरकार के अनुसार मजदूरी दरों में वृद्धि से करोड़ों ग्रामीण श्रमिकों की आय बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।