दिल्ली डेस्क
राजधानी दिल्ली में हाल ही में घरेलू सहायकों द्वारा की गई दो बड़ी वारदातों ने लोगों के मन में चिंता पैदा कर दी है। इन घटनाओं ने पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। घरेलू सहायकों के सत्यापन में न तो पुलिस गंभीर है और न ही लोग जागरूक हो रहे हैं। इस लापरवाही के कारण ही घरेलू सहायकों की भूमिका अब जानलेवा बनती जा रही है।
कानून के अनुसार, घरेलू सहायकों, किरायेदारों और निजी ड्राइवरों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य है। यदि कोई मकान मालिक सत्यापन नहीं कराता है, तो पुलिस उनके खिलाफ मामला दर्ज कर सकती है, जिसमें जेल और जुर्माने का प्रविधान है।
दिल्ली पुलिस के आंकड़ों को देखा जाए जो राजधानी में 2020 से 2025 के बीच घरेलू सहायकों द्वारा लूट और चोरी की 750 से अधिक वारदात को अंजाम दिया गया। इनमें करीब 650 आरोपित गिरफ्तार किए गए। इनमें ज्यादातर मामलों में घरेलू सहायक का सत्यापन नहीं कराया गया था।
कुछ दिन पहले लुटियंस दिल्ली में शराब कारोबारी प्रवीण चावला के घरेलू सहायक सुशील कामत ने साथियों के साथ मिलकर घर में लूटपाट की वारदात को अंजाम दिया था। इसके बाद घरेलू सहायिका ने बाहरी दिल्ली में काम शुरू करने के तीन दिन में ही नकदी व जेवरात चोरी कर लिए। इसी बीच अमर कालोनी में आइआरएस अधिकारी के यहां काम कर चुके घरेलू सहायक राहुल मीणा ने उनकी बेटी की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी।
सुशील कामत का पुलिस सत्यापन नहीं कराया गया था। इसमें कारोबारी और स्थानीय थाना पुलिस दोनों की लापरवाही थी। जांच में पता चला कि कामत का आपराधिक इतिहास था और वह पहले भी कई बार घरेलू सहायकों के रूप में काम कर चुका था और गाजियाबाद व दिल्ली में वारदात को अंजाम दिया था।
यदि उसका सत्यापन किया गया होता, तो ये घटनाएं टल सकती थीं। इसी तरह बाहरी दिल्ली में हुई चोरी में भी पुलिस सत्यापन नहीं कराया था। जबकि उसने इससे पूर्व दो अन्य घरों में भी इसी तरह चोरी की वारदात को अंजाम दिया।