स्पेशल डेस्क
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस में आयोजित G-7 शिखर सम्मेलन के दौरान सुरक्षित समुद्री मार्गों और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कई देशों को जान-माल का नुकसान उठाना पड़ा है और इस संघर्ष में भारत के कुछ नागरिकों की भी मौत हुई है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि “वैश्विक समुद्री व्यापार दुनिया की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि नाविकों को बिना किसी भय के अपना कार्य करने का अवसर मिलना चाहिए।”
हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत
प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब 9 जून को ओमान तट के पास कमर्शियल जहाज़ सेटेबेलो पर हुए अमेरिकी सैन्य हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हुई थी। जहाज़ पर कुल 24 भारतीय क्रू सदस्य सवार थे, जिनमें से 21 को सुरक्षित बचा लिया गया था।
इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र में भारतीय क्रू वाले दो अन्य जहाज़ भी हमलों की चपेट में आए थे, हालांकि उनमें कोई हताहत नहीं हुआ था।
ट्रंप से भी हुई मुलाकात
G-7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी मुलाकात की। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और भारत पर लगाए गए अमेरिकी टैरिफ़ के बाद दोनों नेताओं की यह पहली आमने-सामने की बैठक थी।
भारत को G-7 सम्मेलन में अतिथि देश के रूप में आमंत्रित किया गया था। सम्मेलन में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका सहित दुनिया की प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाएं शामिल हुईं।
पीएम मोदी ने क्या कहा ?
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि आज की दुनिया पहले से कहीं अधिक परस्पर जुड़ी हुई है और किसी भी देश की ऊर्जा, खाद्य, स्वास्थ्य, साइबर और आर्थिक सुरक्षा केवल उसकी सीमाओं के भीतर तय नहीं होती।
उन्होंने कहा कि आज की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्ति कोई खनिज, तकनीक या बाज़ार नहीं, बल्कि देशों के बीच आपसी विश्वास है। उन्होंने वैश्विक संस्थाओं को अधिक प्रभावी और समावेशी बनाने की भी आवश्यकता बताई।
विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना
प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद विपक्षी दलों ने उन पर निशाना साधा। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा कि “प्रधानमंत्री ने भारतीय नाविकों की मौत का ज़िक्र तो किया, लेकिन अमेरिका का नाम लेने से परहेज़ किया।” उन्होंने आरोप लगाया कि तीन भारतीय नागरिकों की मौत के बावजूद सरकार अमेरिका के खिलाफ़ खुलकर बोलने से बच रही है।
वहीं आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि “भारतीय जहाज़ों पर हुए हमलों के बावजूद केंद्र सरकार अमेरिका के प्रति नरम रुख़ अपनाए हुए है।”
भारत ने दर्ज कराया था विरोध
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस घटना के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बातचीत कर भारत की ओर से कड़ा विरोध दर्ज कराया था। भारत ने इस हमले को अनुचित बताते हुए चिंता व्यक्त की थी।
हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा था कि “खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नाकेबंदी का उल्लंघन और ईरानी तेल की अवैध ढुलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि “तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भी अमेरिका की ओर से न तो खेद व्यक्त किया गया और न ही माफ़ी मांगी गई।”
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि “भारत को अपने नागरिकों की सुरक्षा और राष्ट्रीय सम्मान के मुद्दे पर अधिक सख्त रुख़ अपनाना चाहिए।”
संसद और राजनीतिक बहस
G-7 सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा समुद्री सुरक्षा और भारतीय नागरिकों की मौत का मुद्दा उठाए जाने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि अमेरिका का नाम सीधे तौर पर न लेने के कारण विपक्ष ने इसे सरकार की कूटनीतिक कमजोरी बताते हुए राजनीतिक हमला तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और राजनीतिक बहस का विषय बन सकता है।