उत्तराखंड डेस्क
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश समेत पहाड़ी राज्यों में इन दिनों जंगलों में आग लगने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। बढ़ती आग की घटनाओं को देखते हुए राज्य सरकार और वन विभाग अलर्ट मोड पर हैं। प्रशासन की ओर से आग पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इसी बीच उत्तराखंड के चमोली जिले से सामने आया एक बयान अब विवाद का विषय बन गया है।
दरअसल, चमोली में तैनात वन अधिकारी सर्वेश दुबे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वह स्थानीय लोगों को जंगल की आग बुझाने को लेकर चेतावनी देते नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि “यदि लोग जंगल में लगी आग बुझाने के लिए आगे नहीं आए तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने यहां तक कहा कि “जंगल की आग में कूद कर आग बुझाओ, नहीं तो होगी एक साल की जेल!”
इसी मुद्दे को लेकर उत्तराखंड एकता मंच के सदस्य अनूप बिष्ट ने भी सवाल उठाए हैं। अनूप बिष्ट का कहना है कि सरकार और वन विभाग को सबसे पहले जंगलों में आग लगने के असली कारणों की जांच करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों पर दबाव बनाने की बजाय वन विभाग को अपनी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की जरूरत है।
अनूप बिष्ट लंबे समय से उत्तराखंड में 5वीं अनुसूची लागू करने की मांग भी उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि “पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय समुदायों को जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों पर अधिक अधिकार मिलने चाहिए ताकि वे अपने पारंपरिक तरीकों से जंगलों की सुरक्षा कर सकें।