आंतरिक आय में 19.56% और कुल राजस्व में 17.27% की वृद्धि, वित्तीय रूप से सबसे मजबूत दौर में निगम : सत्या शर्मा
विशेष डेस्क | अनिल गुप्ता
नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने दावा किया है कि भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकार के गठन के बाद निगम ने वित्तीय प्रबंधन, राजस्व संग्रहण और संसाधनों के बेहतर उपयोग के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में एमसीडी ने अपने इतिहास का सर्वाधिक 14,549.06 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है, जो अब तक किसी भी वित्तीय वर्ष में प्राप्त सबसे अधिक आय है।
सत्या शर्मा ने कहा कि “पिछले कुछ वर्षों से दिल्ली की जनता लगातार यह सुनती रही कि एमसीडी आर्थिक संकट से गुजर रही है, कर्मचारियों के वेतन के लिए धन नहीं है और विकास कार्य संसाधनों के अभाव में प्रभावित हो रहे हैं। लेकिन वर्तमान आंकड़े यह साबित करते हैं कि समस्या संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि उनके प्रभावी प्रबंधन और प्राथमिकताओं की थी।
एक वर्ष में 2,142 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी
उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में, जब दिल्ली सरकार और एमसीडी दोनों में आम आदमी पार्टी का शासन था, निगम की कुल आय 12,406.75 करोड़ रुपये थी। वहीं भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकार बनने के बाद वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 14,549.06 करोड़ रुपये पहुंच गई। यानी मात्र एक वर्ष में 2,142.31 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई, जो 17.27 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी है।
आंतरिक आय में भी ऐतिहासिक उछाल
सत्या शर्मा के अनुसार, एमसीडी की अपनी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2024-25 में निगम का आंतरिक राजस्व 9,400.20 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 11,239.24 करोड़ रुपये हो गया। इस प्रकार निगम की अपनी कमाई में 1,839.04 करोड़ रुपये अथवा 19.56 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल किसी एक राजस्व स्रोत के कारण नहीं, बल्कि लगभग सभी प्रमुख आय स्रोतों में सुधार और पारदर्शी राजस्व संग्रहण व्यवस्था का परिणाम है।
दिल्ली सरकार से मिलने वाले अनुदान में भी बढ़ोतरी
स्थायी समिति अध्यक्ष ने बताया कि दिल्ली सरकार से प्राप्त होने वाले राजस्व और अनुदान में भी वृद्धि हुई है। वर्ष 2024-25 में एमसीडी को 2,983.87 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 3,309.82 करोड़ रुपये हो गए। यानी निगम को 325.95 करोड़ रुपये अतिरिक्त प्राप्त हुए।
उन्होंने कहा कि “जब दिल्ली सरकार और एमसीडी के बीच टकराव के बजाय समन्वय होता है, तो उसका सीधा लाभ जनता को मिलता है।”
संपत्ति कर और हस्तांतरण शुल्क बने सबसे बड़े राजस्व स्रोत
सत्या शर्मा ने बताया कि “निगम की आय में सबसे बड़ा योगदान संपत्ति कर और संपत्ति हस्तांतरण शुल्क का रहा। वर्ष 2025-26 में:
- संपत्ति कर से 3,113.07 करोड़ रुपये
- संपत्ति हस्तांतरण शुल्क से 3,758.59 करोड़ रुपये
- विज्ञापन से 441.30 करोड़ रुपये
- कार पार्किंग से 166.18 करोड़ रुपये
- सिविक सेंटर के सी-ब्लॉक की लीज से 182.71 करोड़ रुपये
का राजस्व प्राप्त हुआ।
विज्ञापन और परिसंपत्तियों से आय में जबरदस्त बढ़ोतरी
उन्होंने कहा कि विज्ञापन राजस्व में 22.82 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2024-25 में जहां विज्ञापन से 359.32 करोड़ रुपये की आय हुई थी, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 441.30 करोड़ रुपये हो गई।
इसके अलावा, सिविक सेंटर के सी-ब्लॉक की लीज से प्राप्त आय 75.23 करोड़ रुपये से बढ़कर 182.71 करोड़ रुपये पहुंच गई, जो 142.87 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाती है। सत्या शर्मा ने इसे निगम की परिसंपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और प्रभावी उपयोग का परिणाम बताया।
‘बहानों की राजनीति नहीं, व्यवस्था सुधार पर दिया जोर’
सत्या शर्मा ने कहा कि आम आदमी पार्टी के शासनकाल में निगम की आर्थिक स्थिति को लेकर लगातार संकट की बात की जाती थी और हर समस्या के लिए अन्य संस्थाओं को जिम्मेदार ठहराया जाता था। इसके विपरीत भाजपा ने व्यवस्था सुधार, राजस्व संग्रहण को मजबूत करने, कर प्रशासन को प्रभावी बनाने और आय के नए स्रोत विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया।
जनसुविधाओं पर खर्च होंगे बढ़े हुए संसाधन
उन्होंने कहा कि आज एमसीडी अपने इतिहास के सबसे मजबूत वित्तीय दौर में खड़ी है। मजबूत आर्थिक स्थिति के कारण निगम अब सफाई व्यवस्था में सुधार, लैंडफिल साइटों के निस्तारण, पार्कों के विकास, सड़कों और गलियों के रखरखाव, जनस्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार तथा आधुनिक नागरिक सुविधाओं के विकास पर अधिक संसाधन खर्च कर पा रहा है।
एमसीडी को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य
सत्या शर्मा ने कहा कि भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकार ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि नीयत साफ हो, प्रबंधन प्रभावी हो और सरकारों के बीच समन्वय हो, तो किसी भी संस्था को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निगम का लक्ष्य केवल राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रत्येक रुपये का उपयोग दिल्लीवासियों को बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने में करना है।
अंत में उन्होंने निगम के अधिकारियों, कर्मचारियों, करदाताओं और दिल्लीवासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में भी एमसीडी को अधिक आत्मनिर्भर, आधुनिक और जनोन्मुखी बनाने के लिए प्रयास जारी रहेंगे।