सरल डेस्क
ईरान के विदेश मंत्री ने कहा है कि अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जवाबी हमले को लीड कर रही एलीट फोर्स इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) अकेले काम कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ओमान पर हमला हमारी पसंद नहीं थी। ईरानी क्रांति के बाद मई 1979 में रूहोल्लाह खुमैनी ने आईआरजीसी बनाया था। यह पारंपरिक ईरानी सेना से अलग है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 1979 में सरकार बदलने के बाद ईरान के रूलिंग मौलवियों ने एक नया संविधान पेश किया, जिसमें ईरान की सीमाओं की रक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक रेगुलर मिलिट्री (आर्टेश) और ईरान में इस्लामिक सिस्टम की रक्षा के लिए एक अलग रिवोल्यूशनरी गार्ड (पासदारन) का इंतजाम किया गया।
IRGC ईरान के सुप्रीम लीडर को रिपोर्ट करता है और यह पद अयातुल्ला अली खामेनेई के पास था। हालांकि, अब खामेनेई की अमेरिकी-इजरायली हमले में मौत हो चुकी है। इसका मतलब है कि IRGC अब बिना हेड के है और अकेले काम कर रहा है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अल जजीरा के साथ एक इंटरव्यू के दौरान एक चौंकाने वाली बात कही। ओमान पोर्ट को टारगेट करके किए गए स्ट्राइक के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने जवाब दिया, “ओमान में जो हुआ, वह हमारी मर्जी नहीं थी। हमने अपनी आर्म्ड फोर्सेज को पहले ही बता दिया है कि वे जो टारगेट चुनें, उन्हें लेकर सावधान रहें।” फिर उन्होंने कहा, “असल में हमारी मिलिट्री यूनिट्स अब असल में इंडिपेंडेंट हैं और किसी तरह अलग-थलग हैं। वे पहले से दिए गए इंस्ट्रक्शन्स के आधार पर काम कर रही हैं।”