प्रकाश मेहरा
उत्तराखंड डेस्क
चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले के कर्णप्रयाग में 16 जून को हुई झड़प के बाद शुरू हुआ विवाद अब उत्तराखंड-हिमाचल सीमा तक पहुंच गया है। 25 जून गुरुवार देर रात पंजाब से उत्तराखंड की ओर बढ़ रहे निहंग सिखों के एक जत्थे को उत्तराखंड पुलिस ने देहरादून जिले के कुल्हाल बॉर्डर पर रोक दिया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की और हल्की झड़प हुई। हालांकि पुलिस ने स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखा और जत्थे को आगे बढ़ने से रोकते हुए वापस हिमाचल प्रदेश की ओर भेज दिया।
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों में पुलिस और निहंग सिखों के बीच बैरिकेडिंग के पास धक्का-मुक्की साफ दिखाई दे रही है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक कड़ी कर दी गई।
क्या हुआ कुल्हाल बॉर्डर पर ?
जानकारी के अनुसार, निहंग सिखों का यह जत्था पंजाब के मोहाली स्थित एक गुरुद्वारे से उत्तराखंड के लिए रवाना हुआ था। प्रशासन को पहले से इसकी सूचना थी, जिसके चलते उत्तराखंड पुलिस ने हिमाचल प्रदेश से लगने वाली सीमा पर भारी पुलिस बल और अर्द्धसैनिक बल की तैनाती कर दी थी।
पुलिस ने कुल्हाल बॉर्डर पर बैरिकेडिंग लगाकर जत्थे को रोकने का प्रयास किया। अधिकारियों ने कई दौर की बातचीत कर उन्हें आगे न बढ़ने की अपील की। प्रारंभिक बातचीत के दौरान अधिकांश लोग पुलिस की बात मानने को तैयार हो गए, लेकिन लगभग 15 से 20 निहंग सिख बैरिकेड पार कर उत्तराखंड सीमा में प्रवेश करने लगे। इसके बाद पुलिस ने उन्हें रोक दिया और आगे बढ़ने नहीं दिया। स्थिति कुछ देर के लिए तनावपूर्ण रही, लेकिन बाद में प्रशासन ने मामले को शांतिपूर्वक नियंत्रित कर लिया।
पुलिस का क्या कहना है ?
देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) प्रमेन्द्र डोभाल ने बताया कि पुलिस ने कुल्हाल बैरियर और पांवटा साहिब गुरुद्वारे में निहंग प्रतिनिधियों से कई दौर की बातचीत की थी। उन्होंने कहा “अधिकांश लोगों ने पुलिस की अपील मान ली थी, लेकिन 15 से 20 लोगों का एक समूह दूसरे बैरियर से आगे बढ़ने की कोशिश करने लगा। पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे क्षेत्र में पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात किया गया है।”
प्रशासन का कहना है कि “किसी भी व्यक्ति को कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी और पूरी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।”
निहंग सिखों की क्या है मांग ?
मीडिया से बातचीत में निहंग प्रतिनिधि अकाली जसदीप सिंह ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का संघर्ष करना नहीं है, बल्कि शांतिपूर्ण समाधान निकालना है। उन्होंने कहा “हम लड़ाई नहीं चाहते, बल्कि भाईचारा और प्रेम बढ़ाना चाहते हैं। गलती हमारी नहीं थी, फिर भी हम माफी मांगने को तैयार हैं। हमारी मांग है कि गिरफ्तार किए गए चार निहंग सिखों को रिहा कर पंजाब भेजा जाए।”
उन्होंने आगे कहा कि उन्हें हेमकुंड साहिब की यात्रा करने की अनुमति दी जाए। उनका कहना था कि चारों आरोपियों की जल्द ही जमानत होने की संभावना है और यात्रा से लौटते समय वे उन्हें अपने साथ पंजाब ले जाएंगे। निहंग प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि “जब तक उनके चारों साथी उनके साथ नहीं होंगे, तब तक वे वापस नहीं लौटेंगे।”
क्या है पूरा विवाद ?
यह विवाद 16 जून को चमोली जिले के कर्णप्रयाग में उस समय शुरू हुआ था, जब हेमकुंड साहिब से लौट रहे निहंग सिख यात्रियों और स्थानीय लोगों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। देखते ही देखते विवाद मारपीट में बदल गया। इस मामले में पुलिस ने चार निहंग सिखों को गिरफ्तार किया था। इन्हीं गिरफ्तारियों के विरोध में निहंग संगठनों ने 25 जून को कर्णप्रयाग कूच का आह्वान किया था।
हालांकि इससे पहले निहंग प्रतिनिधियों और उत्तराखंड सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच वार्ता भी हुई थी। वार्ता के बाद कुछ प्रतिनिधियों ने संतोष जताया, लेकिन एक वर्ग अपने कर्णप्रयाग जाने के निर्णय पर अडिग रहा।
हिमाचल सीमा पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम
संभावित तनाव को देखते हुए उत्तराखंड पुलिस ने हिमाचल सीमा पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। कुल्हाल बॉर्डर को अस्थायी सुरक्षा छावनी में बदल दिया गया है। कई थानों की पुलिस, पीएसी और अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।
फिलहाल कुल्हाल बॉर्डर पर स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। निहंग सिखों का जत्था उत्तराखंड में प्रवेश नहीं कर सका और पुलिस ने उन्हें वापस हिमाचल प्रदेश की ओर भेज दिया। प्रशासन और निहंग प्रतिनिधियों के बीच बातचीत जारी रहने की संभावना है ताकि मामले का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके।