प्रकाश मेहरा
विशेष डेस्क
उस अजमेर कांड का तो स्मरण होगा ही, जो 1992 में घटित हुआ था और जिसके खुलासे ने देश को हिलाकर रख दिया था। अजमेर में करीब सौ छात्राओं को ब्लैकमेल कर उनका लंबे समय तक यौन शोषण किया गया था। एक छात्रा संग दुष्कर्म के बाद उसके अंतरंग फोटो लेकर उसकी अन्य सहेलियों को चंगुल में फंसाया गया और फिर एक घिनौना सिलसिला कायम हो गया। यह मामला उजागर होने के बाद कई छात्राओं ने आत्महत्या कर ली थी।
छात्राओं को ब्लैकमेल कर उनका यौन शोषण करने वाले अजमेर के ख्वाजा गरीब नवाज के खादिम एवं उसके साथी थे और उनकी हैवानियत की शिकार छात्राएं हिंदू थीं। बाद में अजमेर जैसे और भी कांड कई शहरों में सामने आए। एक तो पिछले साल अजमेर के ही विजयनगर में सामने आया, जिसमें हिंदू लड़कियों के यौन शोषण के साथ उनका जबरन मतांतरण कराने की कोशिश की गई। एक अन्य मामला भोपाल में सामने आया। यहां के एक कालेज की कई हिंदू छात्राओं को मुस्लिम लड़कों ने हिंदू नाम से प्यार के जाल में फंसाकर ब्लैकमेल किया और फिर वे उन्हें इस्लाम कुबूल करने के लिए मजबूर करने लगे।
देश में अजमेर जैसे कितने कांड हो चुके हैं, उनकी गिनती करना कठिन है, लेकिन यह समझ लीजिए कि लंदन के ग्रूमिंग गैंग की तरह भारत में जगह-जगह जिहादी सोच वाले युवकों के ऐसे ग्रूमिंग गिरोह सक्रिय हैं, जो दूसरे मजहब की लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाने और उनका यौन शोषण करने के बाद उन्हें इस्लाम स्वीकार करने को विवश करते हैं। कई इस्लामिक दावा सेंटर वस्तुतः ग्रूमिंग गैंग ही हैं। ये सबको इस्लामी परचम तले लाने के लिए इतने अधिक जुनून से भरे हैं कि कुछ वर्ष पहले एक दावा सेंटर नोएडा के मूक-बधिर छात्रों का ब्रेनवाश कर मतांतरण करने में लगा हुआ था।
इसी प्रकार बलरामपुर, यूपी में छांगुर बाबा नामक एक फकीर छल-बल से हिंदुओं का मतांतरण करने में जुटा था। दीन की दावत देने की सनक पाले इस्लामिक दावा सेंटर किस तरह ग्रूमिंग गैंग सरीखा काम करते हैं, इसकी एक झलक फिल्म ‘द केरला स्टोरी’ में दिखाई गई थी। इस फिल्म में बताया गया था कि हिंदू लड़कियों का कैसे ब्रेनवाश किया जाता है और किस तरह वेद, पुराण की बातों को मनगढ़ंत बताते हुए देवी-देवताओं को लांछित कर उन्हें यह समझाया जाता है कि एकमात्र सच्चा मजहब इस्लाम ही है, बाकी सब झूठे हैं।
फर्जी किस्म के लिबरल-सेक्युलर लोगों को यह फिल्म केरल में ऐसे कई मामले सामने आने के बाद भी रास नहीं आई थी, जो यह बताते थे कि मुस्लिम युवकों ने किस तरह हिंदू एवं ईसाई लड़कियों का ब्रेनवाश कर उन्हें मुसलमान बनाया और फिर उन्हें जिहाद के लिए अफगानिस्तान, सीरिया ले जाने की कोशिश की। द केरला स्टोरी को प्रोपेगंडा फिल्म बताना आसान था, लेकिन टीसीएस नासिक दफ्तर में जो कुछ हुआ, उसे किसी के लिए भी नकारना मुश्किल है, क्योंकि यह एक जीती-जागती द केरला स्टोरी ही है।
टीसीएस के नासिक कार्यालय में काम करने वाले कुछ मुस्लिम कर्मी एक गिरोह बनाकर कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि वाली अथवा किसी तरह की पारिवारिक समस्या से ग्रस्त हिंदू महिला कर्मचारियों को प्रमोशन, आकर्षक वेतनवृद्धि का लालच देकर या फिर प्यार का नाटक करके उनका यौन शोषण करने के साथ उनका मतांतरण कराने की कोशिश में लगे थे। इस गिरोह का भांडा तब फूटा, जब एक हिंदू लड़की रोजा रखने लगी। अब सामने आ रहा है कि कई हिंदू लड़कियों को इस्लामी तौर-तरीके अपनाने, मांस खाने और इस्लाम कुबूल करने के लिए मजबूर किया गया। इनका यौन शोषण भी किया गया-किसी का जबरन और किसी के साथ लव जिहाद के जरिये। चूंकि इस गिरोह में एचआर विभाग की एक मुस्लिम महिला भी शामिल थी, इसलिए पीड़ित लड़कियों की शिकायत नहीं सुनी गई और उलटे उन्हें नौकरी से हाथ धोने की धमकी दी गई।
आखिर टीसीएस जैसी कंपनी में एचआर विभाग के आगे शिकायत-सुनवाई की कोई व्यवस्था क्यों नहीं थी? क्या यौन उत्पीड़न रोकने वाली समिति यानी प्रिवेंशन आफ सेक्सुअल हैरेसमेंट कमिटी केवल कागजों में थी? टीसीएस टाटा समूह की कंपनी होने के साथ ही देश की सबसे बड़ी आइटी भी कंपनी है। जब ऐसी नामी कंपनी में सुनियोजित तरीके से यौन उत्पीड़न हो रहा था और उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई तो उन अन्य छोटी-मोटी कंपनियों का क्या हाल होगा, जहां इस सनक से ग्रस्त कर्मचारी-अधिकारी प्रभावशाली पदों पर बैठे हों कि दूसरे मजहब वालों को येन-केन-प्रकारेण मुसलमान बनाना है या फिर गजवा-ए-हिंद करना है?
पहले माना जाता था कि छल-बल, लोभ-लालच से दूसरे मजहब वालों और खासकर हिंदुओं को मुसलमान बनाने की सनक से कुछ मुल्ला-मौलवी किस्म के लोग ही ग्रस्त हैं, पर अब तो पढ़े-लिखे मुस्लिम युवा भी इसी सोच से ग्रस्त दिख रहे हैं। इसी सोच का नतीजा है लव जिहाद। यह शब्द केरल हाई कोर्ट की देन है, क्योंकि वहां ऐसे कई मामले आए थे, जिनमें मुस्लिम लड़कों ने हिंदू-ईसाई लड़कियों को झूठे प्रेमजाल में फंसाकर मुसलमान बनाया। उन्होंने इन लड़कियों के मन में अपने स्वजनों के प्रति भी घृणा पैदा कर दी, लेकिन देश में ऐसे लोगों की कमी नहीं, जो लव जिहाद को कुछ लोगों की कपोल कल्पना समझते हैं। यह और कुछ नहीं जीती मक्खी निगलने वाली समझ या फिर कहें कि सनक है।