दिल्ली डेस्क
पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार के एक दावे ने पार्टी में संभावित टूट की चर्चाओं को हवा दे दी। उनके बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं और विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगीं।
दरअसल, सोमवार को काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि उनके साथ टीएमसी के लगभग 20 सांसद हैं और उन्होंने लोकसभा स्पीकर से अनुरोध किया है कि उन्हें सदन में अलग बैठने की अनुमति दी जाए। इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई कि क्या टीएमसी के भीतर किसी बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है।
बीजेपी और दल बदल की राजनीति पर निशाना
हालांकि, इस दावे के अगले ही दिन मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन अटकलों पर सवाल खड़े किए। पार्टी की ओर से कहा गया कि यदि लोकसभा स्पीकर को वास्तव में कोई पत्र भेजा गया है, तो उसे अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया। टीएमसी ने इस पूरे मामले को संदेहास्पद बताते हुए दावे की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठाए।
इसी बीच कांग्रेस की ओर से भी इस मामले पर प्रतिक्रिया सामने आई। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने एग्जीक्यूटिव एडिटर प्रकाश मेहरा से बातचीत में बीजेपी और दल बदल की राजनीति पर निशाना साधा।
“बीजेपी की वॉशिंग मशीन” की राजनीति
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि “जिन नेताओं को पहले भ्रष्टाचार और अन्य आरोपों से जोड़ा जाता रहा, वही नेता बीजेपी में शामिल होने के बाद अचानक स्वीकार्य हो जाते हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि यह “बीजेपी की वॉशिंग मशीन” की राजनीति जैसा दिखाई देता है।”
कांग्रेस प्रवक्ता ने आगे कहा कि “जनता अपने प्रतिनिधियों को एक विशेष राजनीतिक विचार और जनादेश के आधार पर चुनती है। ऐसे में यदि कोई सांसद चुनाव जीतने के बाद किसी दूसरी राजनीतिक दिशा में जाना चाहता है, तो उसे पहले अपने पद से इस्तीफा देकर दोबारा जनता के बीच जाना चाहिए।
चुनाव लड़कर जनता से नया जनादेश लेना चाहिए
उन्होंने कहा, “जनता ने आपको जिस विचार और जिस दल के खिलाफ वोट दिया था, उस जनादेश का सम्मान होना चाहिए। अगर कोई बीजेपी का समर्थन करना चाहता है या उसमें शामिल होना चाहता है, तो उसे दोबारा चुनाव लड़कर जनता से नया जनादेश लेना चाहिए।”
फिलहाल टीएमसी में संभावित टूट को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है और पार्टी नेतृत्व की ओर से भी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक घटनाक्रम और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।