सरल डेस्क
भारत और नेपाल के बॉर्डर पर दशकों से लोग आसानी से एक तरफ से दूसरी तरफ आ जा सकते हैं। इस आवाजाही से नेपाल के लोगों को पूरा फायदा मिलता रहा है, जिससे वो भारत के सीमावर्ती बाजारों में किराने का सामान, दवाएं, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स और शादी-ब्याह का सामान खरीदने आते हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के कस्टम ड्यूटी लगाने से नेपाल के लोगों के लिए दिक्कतें बढ़ गई हैं। नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं।
नेपाल के कस्टम ड्यूटी वाले फैसले पर अब भारतीय विदेश मंत्रालय का बयान सामने आया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘हमें नेपाली अधिकारियों द्वारा एक मौजूदा नियम को लागू किए जाने की रिपोर्ट की जानकारी है, जिसके तहत सीमा पार करने वाले यात्रियों से कस्टम ड्यूटी ली जाती है, यदि वे भारत में खरीदे गए 100 नेपाली रुपया से अधिक मूल्य का सामान अपने साथ ले जा रहे हों।’
रणधीर जायसवाल ने आगे कहा, ‘हम समझते हैं कि नेपाल सरकार ने यह कदम मुख्य रूप से अनौपचारिक व्यापार और तस्करी पर रोक लगाने के उद्देश्य से उठाया है।’ विदेश मंत्रालय की तरफ से आगे बताया गया, ‘हमने एक वरिष्ठ नेपाली अधिकारी का यह बयान भी देखा है कि निजी इस्तेमाल के लिए घरेलू सामान ले जा रहे आम लोगों को नहीं रोका जाएगा।’
भारत के बिहार राज्य की सीमा नेपाल से लगती है। ऐसे में नेपाल के लोग बिहार आकर अपनी जरूरत का सामान ले जाते थे। अब विदेश मंत्रालय के बयान से साफ है कि निजी इस्तेमाल के लिए सामान ले जाने वाले लोगों को बिहार बॉर्डर पर नहीं रोका जाए। नेपाल के लोगों को सीमा पार करके भारत से सामान ले जाने में अब तक कभी कोई दिक्कत नहीं आई थी, लेकिन अब उन्हें परेशानी झेलनी पड़ रही है।
प्रधानमंत्री बालेन शाह के इस फैसले के खिलाफ नेपाल में विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं। बालेन शाह की सरकार ने कस्टम ड्यूटी (सीमा शुल्क) लागू करने के नियम को नजरअंदाज किया हुआ था, लेकिन अब नेपाल सरकार इस फैसले पर लोगों का विरोध झेल रही है।