प्रकाश मेहरा
स्पेशल डेस्क
बिहार:- साढ़े छह दशक का इंतजार आखिरकार खत्म हुआ। इतिहास ने एक बार फिर करवट ली और मुंगेर की धरती ने बिहार को अपना मुख्यमंत्री दिया। इस बार यह गौरव तारापुर के लखनपुर गांव निवासी सम्राट चौधरी के रूप में सामने आया है। 65 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद मुंगेर से कोई नेता प्रदेश के सर्वोच्च पद तक पहुंचा है, जिससे पूरे जिले में उत्साह और गर्व का माहौल है। इससे पहले मुंगेर ने बिहार को पहला मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के रूप में दिया था, जिन्हें बिहार केसरी के नाम से जाना जाता है।
वर्ष 1961 में उनके निधन के बाद से यह गौरव फिर मुंगेर को नहीं मिला था। अब सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही यह ऐतिहासिक सिलसिला एक बार फिर जीवंत हो उठा है। मंगलवार को भाजपा विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से सम्राट चौधरी को नेता चुना गया, जिससे उनके मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया।
केंद्रीय पर्यवेक्षक और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनके नाम की औपचारिक घोषणा की। यह निर्णय न केवल उनके राजनीतिक अनुभव का सम्मान है, बल्कि उनकी कार्यशैली और नेतृत्व क्षमता पर पार्टी के भरोसे का प्रतीक भी है।
सम्राट चौधरी को एक सजग, साहसी और कुशल संवादशैली वाले नेता के रूप में जाना जाता है। हजारों की भीड़ में अपने कार्यकर्ताओं को पहचान लेना और नाम लेकर उनका उत्साह बढ़ाना उनकी खास पहचान है। यही कारण है कि कार्यकर्ताओं के बीच उनकी लोकप्रियता बेहद मजबूत है।
वे जहां भी रहे, अपने समर्थकों को सम्मान और पहचान दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनकी यह विशेषता उन्हें विरासत में मिली है। उनके पिता शकुनी चौधरी राज्य के कद्दावर नेताओं में गिने जाते हैं। नौ दशक के करीब उम्र होने के बावजूद आज भी उनकी राजनीतिक पकड़ मजबूत है। बड़े-बड़े नेता नीतिगत मामलों में उनसे सलाह लेते रहे हैं। सम्राट चौधरी ने अपने पिता की इसी राजनीतिक समझ और जनसंपर्क शैली को आगे बढ़ाया है। सम्राट चौधरी की राजनीतिक यात्रा भी बेहद प्रेरक रही है।
उन्होंने वर्ष 2000 में खगड़िया जिले के परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से विधायक बनकर अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। सबसे कम उम्र में कैबिनेट मंत्री बनने का गौरव भी उन्हें मिला। इसके बाद 2010 में दोबारा विधायक बने और फिर अलग-अलग राजनीतिक पड़ावों से गुजरते हुए 2018 में भाजपा में शामिल हुए। भाजपा में आने के बाद उनका कद तेजी से बढ़ा।
वे 2020 में विधान परिषद सदस्य बने, फिर नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाली। मार्च 2023 में उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया और बाद में उपमुख्यमंत्री के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई। तारापुर से 2025 में विधायक बनने के बाद उन्होंने दोबारा उपमुख्यमंत्री पद संभाला और गृह विभाग जैसे अहम मंत्रालय की जिम्मेदारी निभाई। शहरी विकास, पंचायती राज, खेल, वित्त और गृह जैसे विभागों का अनुभव उन्हें प्रशासनिक दृष्टि से भी मजबूत बनाता है। यही वजह है कि उनके मुख्यमंत्री बनने से विकास की नई उम्मीदें जगी हैं, खासकर मुंगेर और आसपास के क्षेत्रों में।