
स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान भारत की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षमता को लेकर दिए गए एक बयान पर विवाद खड़ा हो गया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की लीडरशिप द्वारा भारत को ‘सेकंड टीयर AI पावर’ बताए जाने पर केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
अश्विनी वैष्णव ने इस टिप्पणी को तथ्यों से परे बताते हुए कहा कि भारत को AI के क्षेत्र में कमतर आंकना पूरी तरह गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठित AI रैंकिंग सूची में भारत तीसरे स्थान पर है, जो देश की तकनीकी क्षमता और नवाचार की ताकत को दर्शाता है।
“भारत पर दुनिया का भरोसा बढ़ा है”
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज दुनिया भारत की तकनीकी क्षमताओं पर भरोसा कर रही है।
उन्होंने बताया कि—
- भारत में AI स्टार्टअप्स की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है
- वैश्विक टेक कंपनियां भारत में निवेश कर रही हैं
- सरकार की नीतियां AI को समावेशी और जिम्मेदार तरीके से आगे बढ़ाने पर केंद्रित हैं
अश्विनी वैष्णव ने यह भी कहा कि भारत केवल AI का उपभोक्ता नहीं है, बल्कि AI समाधान विकसित करने वाला अग्रणी देश बन चुका है।
AI के क्षेत्र में भारत की मजबूत स्थिति
केंद्रीय मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि भारत—
- डेटा और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में मजबूत आधार रखता है
- स्किल्ड टेक टैलेंट का बड़ा केंद्र है
- हेल्थ, एजुकेशन, कृषि और गवर्नेंस में AI का व्यापक इस्तेमाल कर रहा है
उन्होंने कहा कि भारत की AI रणनीति मानव-केंद्रित है और इसका उद्देश्य तकनीक को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।
IMF की टिप्पणी पर सवाल
IMF की ओर से भारत को ‘सेकंड टीयर AI पावर’ कहे जाने को लेकर विशेषज्ञों का भी मानना है कि यह बयान भारत की मौजूदा तकनीकी प्रगति और वैश्विक प्रभाव को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करता।
दावोस में उठे इस मुद्दे के बाद भारत की AI क्षमताओं पर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि भारत AI के क्षेत्र में पीछे नहीं, बल्कि अग्रणी पंक्ति में खड़ा है।