
दिल्ली डेस्क
नई दिल्ली। देशभर में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला फिलहाल सुरक्षित रख लिया है। शीर्ष अदालत ने इस संवेदनशील और जनहित से जुड़े मुद्दे पर सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से एक सप्ताह के भीतर लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों पर राज्यों की मौखिक दलीलें विस्तार से सुनीं। कोर्ट के समक्ष यह मुद्दा प्रमुख रूप से उठाया गया कि कई राज्यों में आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे आम जनता, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है।
वहीं दूसरी ओर, पशु अधिकारों से जुड़े संगठनों ने भी अदालत में अपनी बात रखी और एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों के पालन पर जोर दिया। संगठनों का कहना है कि आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए नसबंदी और टीकाकरण ही स्थायी और मानवीय समाधान है, न कि हिंसक या गैर-कानूनी तरीके।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला जन-सुरक्षा और पशु कल्याण दोनों से जुड़ा हुआ है, इसलिए किसी भी निर्णय से पहले सभी पक्षों की लिखित दलीलों का अध्ययन किया जाना आवश्यक है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्यों द्वारा प्रस्तुत किए गए तथ्यों, आंकड़ों और सुझावों के आधार पर ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।
फिलहाल, अदालत ने कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया है और अगली सुनवाई से पहले राज्यों को अपनी लिखित दलीलें दाखिल करने का समय दिया गया है। इसके बाद ही सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अपना अंतिम फैसला सुनाएगा।