
दिल्ली डेस्क
नई दिल्ली: दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने राजधानी में बढ़ते कैंसर मामलों को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि दिल्ली की ध्वस्त स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच वर्ष 2025-26 में कैंसर के मामलों में अप्रत्याशित वृद्धि बेहद चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा डे केयर कैंसर सेंटर की घोषणा और दिल्ली को बजट आवंटित होने के बावजूद दिल्ली में अब तक एक भी डे केयर कैंसर सेंटर शुरू नहीं किया गया, जो भाजपा की दिल्ली सरकार की असंवेदनशीलता को दर्शाता है।
देवेंद्र यादव ने कहा कि राजधानी में बढ़ती आबादी के लिए कैंसर का इलाज सिर्फ 3-4 अस्पतालों तक सीमित है, जबकि सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं की भारी कमी है। उन्होंने बताया कि एक वर्ष पहले केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देशभर में 297 डे केयर कैंसर सेंटर स्थापित करने की घोषणा की थी, लेकिन इनमें से अब तक केवल 102 सेंटर ही स्थापित किए जा सके हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने गैर-संचारी रोगों (Non-Communicable Diseases) के लिए दिल्ली को 11.07 करोड़ रुपये आवंटित किए थे, इसके बावजूद दिल्ली में एक भी डे केयर कैंसर सेंटर चालू न होना सरकार की गंभीरता पर सवाल खड़े करता है।
प्रदूषण और पीएम 2.5 को बताया बड़ा कारण
देवेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण का मुख्य कारण बदलती जीवनशैली और हवा में पीएम 2.5 के सूक्ष्म कणों का बढ़ना है, जो सीधे फेफड़ों और श्वसन तंत्र को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2025 में मुंह और गले का कैंसर लगभग 44 प्रतिशत के साथ सबसे अधिक सामने आया है। वहीं स्तन कैंसर 9 प्रतिशत और गॉल ब्लैडर कैंसर 5 प्रतिशत बताया गया है। उन्होंने कहा कि 40-50 वर्ष के लोग कैंसर से अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
आईसीएमआर के आंकड़ों का हवाला
देवेंद्र यादव ने आईसीएमआर के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली में वर्ष 2024 में 28,387 और वर्ष 2023 में 27,561 कैंसर के मामले सामने आए थे। उन्होंने दावा किया कि इस वर्ष कैंसर के मामलों में 23 प्रतिशत वृद्धि होने की उम्मीद है।
चार अस्पतालों में मंजूरी के बाद भी सेंटर शुरू नहीं
उन्होंने कहा कि जुलाई 2025 में दिल्ली सरकार के चार अस्पतालों को डे केयर कैंसर सेंटर के रूप में स्वीकृति दी गई थी। इनमें— दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल। राव तुलाराम मेमोरियल अस्पताल। जनकपुरी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल। पं. मदन मोहन मालवीय अस्पताल। शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन अस्पतालों में जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर्स और नर्सिंग अधिकारियों ने दिल्ली राज्य कैंसर संस्थान से विशेष प्रशिक्षण भी लिया, फिर भी सेंटर चालू नहीं हो पाए।
देवेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि दिल्ली से जुड़ा कोई भी विषय हो, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का काम सिर्फ घोषणा करके उसे “इवेंट” बनाना है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम नहीं होता।
योजना में क्या-क्या होना था
उन्होंने बताया कि योजना के अनुसार प्रत्येक डे केयर कैंसर सेंटर में— 4 से 6 बिस्तर। 2 नर्सें। 1 फार्मासिस्ट। 1 परामर्शदाता (Counsellor)। 1 एमटीएस। 1 ऑन्कोलॉजिस्ट या प्रशिक्षित चिकित्सा अधिकारी। की व्यवस्था होनी थी। लेकिन दिल्ली स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार परियोजना अब भी केवल तैयारी के चरण में है।
उन्होंने यह भी कहा कि संसदीय समिति ने हिदायत दी थी कि अस्पतालों से कर्मचारियों को हटाने के बजाय नर्सों सहित अलग से मानव संसाधन उपलब्ध कराया जाए, लेकिन इस दिशा में काम नहीं हुआ।
स्वास्थ्य मंत्री और सचिव पर भी निशाना
देवेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि दिल्ली में डे केयर कैंसर सेंटर चालू करने के मुद्दे पर दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव निखिल कुमार जवाबदेही से बच रहे हैं, जबकि दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था बढ़ते कैंसर मरीजों के अनुसार बेहद कमजोर है।
कैंसर से मौतों के आंकड़े भी रखे
उन्होंने दावा किया कि पिछले 2 दशकों में दिल्ली में कैंसर से 1.1 लाख लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि वर्ष 2024 में 7400 लोगों की मौत हुई। उन्होंने कहा कि देशभर में हर वर्ष 15 लाख कैंसर के मामले सामने आते हैं, जो वर्ष 2045 तक 67 प्रतिशत बढ़कर 25 लाख होने की आशंका है।